मध्य प्रदेश

महंगे प्लॉट खरीदने वाले चौंके, पश्चिम रिंग रोड में फंसा नया पेंच

By Admin|02 Sep 2025, 10:02 AM
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इंदौर
प्रस्तावित पश्चिम रिंगरोड में नया पेच आ गया है। 64 किमी लंबे पश्चिमी रिंगरोड के लिए जमीन अधिग्रहण करते हुए जिम्मेदारों ने एक वैध कालोनी को भी अधिग्रहण की सूची में शामिल कर लिया। कॉलोनी की जमीन को कृषि भूमि मानकर अवार्ड की तैयारी भी कर ली गई। कॉलोनी के प्लाटधारकों को नोटिस जारी हुआ न ही उनका पक्ष सुना गया। मंहगे दाम पर प्लाट खरीदने वालों को कॉलोनी की जमीन अधिग्रहण की जानकारी लगी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए न्याय की गुहार लगाई। 70 से ज्यादा याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर हुईं। सोमवार को इन सभी में एक साथ सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।
 
मामला देपालपुर तहसील के मोहना और बेटमाखुर्द गांव में आने वाली नेचुरल वैली कॉलोनी का है। इस कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों के संघर्ष की कहानी भी अजीब है। कॉलोनी विकासकर्ता और उनके मार्केटिंग एजेंट ने लोगों से प्लाट के पैसे तो लिए लेकिन वे रजिस्ट्री से मुकर गए। प्लाट खरीदने वालों ने न्यायालय में याचिकाएं दायर की। लंबी जद्दोजहद के बाद इन प्लाटों की रजिस्ट्रियां हो सकीं। शासन ने रजिस्ट्री के वक्त प्रति वर्गफीट के हिसाब से स्टाम्प शुल्क भी खरीदारों से वसूला। रजिस्ट्री के बाद खरीदार यह सोचकर खुश थे कि आखिर उनका संघर्ष अंजाम तक पहुंच गया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, दूसरी परेशानी उनका इंतजार कर रही थी।

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प्लाटों की रजिस्ट्री के कुछ दिन बाद ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पश्चिम रिंग रोड के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमियों के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी। नेचुरल वैली कॉलोनी को भी अधिग्रहण की जाने वाली सूची में शामिल किया गया। विडंबना यह कि प्लाट मालिकों को भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना में स्वामी ही नहीं माना गया बल्कि उस विकासकर्ता को जिसने रजिस्ट्री खरीदारों के नाम की थी उसे स्वामी माना गया।
 
आवासीय कॉलोनी को प्राधिकरण मान रहा कृषि भूमि
प्लाट खरीदारों की ओर से हाई कोर्ट में पैरवी कर रहे एडवोकेट अमित दुबे ने बताया कि यह वैध आवासीय कालोनी है। विधिवत अलग-अलग विभागों से अनुमति प्राप्त की गई थी, बावजूद इसके राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कालोनी की जमीन को कृषि भूमि मान रहा है। जिम्मेदारों ने यह तक पता लगाने की कोशिश नहीं की कि अधिग्रहित की जा रही भूमि आवासीय या कृषि। प्लाट स्वामियों ने प्राधिकरण के समक्ष आपत्ति भी जताई, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इस पर उन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली।

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यह है पश्चिम रिंगरोड
प्रस्तावित पश्चिम रिंगरोड 64 किमी लंबा है। यह शिप्रा से पीथमपुर नेट्रेक्स तक बनया जाना है और इसका निर्माण दो हिस्से में करने की योजना है।

एक हजार करोड़ रुपये मुआवजा
पश्चिम रिंगरोड में इंदौर और धार जिलों की जमीन आ रही है। इंदौर जिले की तीन तहसील और धार जिले की एक तहसील इसमें शामिल है। पश्चिम रिंगरोड की जद में आ रही जमीनों के लिए केंद्र शासन करीब एक हजार करोड़ रुपये की मुआवजा राशि तय कर चुका है। इंदौर जिले में 795 करोड़ और धार जिले में 200 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाना है। इंदौर जिले में 998 किसानों की जमीन पश्चिम रिंगरोड की जद में आ रही है।

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