मध्य प्रदेश

भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में बड़ा बदलाव, आष्टा और सोनकच्छ तक, छह जिलों के 2500 गांव होंगे शामिल

By Admin|27 Mar 2026, 10:04 AM
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भोपाल 

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भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया की पहली रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का कुल क्षेत्रफल 12 हजार वर्ग किलोमीटर होगा। इसमें सीहोर जिले का आष्टा और देवास जिले का सोनकच्छ इलाका भी शामिल होगा, जो भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाला बड़ा जंक्शन बनेगा। रिपोर्ट अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग को सौंप दी गई है। वहीं इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया का क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हो जाएगा। 

छह जिलों की 30 तहसीलें शामिल 
भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया में भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा और नर्मदापुरम जिलों की कुल 30 तहसीलें और लगभग 2500 गांव शामिल किए जाएंगे। नर्मदापुरम जिले का सिर्फ 6 प्रतिशत हिस्सा ही इसमें लिया गया है। इटारसी को इस एरिया में नहीं जोड़ा गया है। इसमें शामिल प्रमुख तहसीलें और इलाके में बैरसिया, हुजूर, कोलार, आष्टा, बुधनी, दोराहा, इछावर, जावर, रेहटी, सीहोर, श्यामपुर, गोहरगंज, रायसेन, सुल्तानपुर, ब्यावरा, खुजनेर, नरसिंहगढ़, पचौर, राजगढ़, सारंगपुर, सुठालिया, गुलाबगंज, विदिशा, डोलरिया, होशंगाबाद, माखन नगर आदि शामिल हैं। 

इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया भी बढ़ेगा
इंदौर विकास प्राधिकरण ने पहले सर्वे में 39 शहरों और 1786 गांवों को मिलाकर 9989 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल बताया था। लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर अब इसमें और इलाके जोड़े जा रहे हैं। नया क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाएगा।

यह फायदा होगा
दोनों शहरों की बड़ी परियोजनाएं अब मिलकर बनाई जाएंगी। शहरों को जोड़ने, सड़क-बिजली-नल-पानी जैसी सुविधाएं देने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। जमीन अधिग्रहण, अतिक्रमण या विभागों के बीच तकरार जैसी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। केंद्र सरकार बड़े शहरों के विकास के लिए अलग से पैकेज देगी। ट्रिलियन प्लस आबादी वाले शहरों को विशेष फंड मिलेगा। दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों को भी 5-5 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद मिलेगी।

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6 माह में तैयार होगी रिपोर्ट 
बीडीए ने सभी शामिल इलाकों की पूरी जानकारी मांगी है। कृषि, राजस्व, परिवहन, लोक निर्माण, उद्योग, पर्यटन, जल संसाधन समेत कई विभागों से जनसंख्या, उद्योग, लोगों की आय और रोजगार संबंधी आंकड़े मांगे गए हैं। रिपोर्ट तैयार करने में 6 महीने और लग सकते हैं। इसके बाद विस्तृत प्लानिंग शुरू होगी। इस फैसले से भोपाल-इंदौर क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज हो जाएगी और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। 

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