मध्य प्रदेश

यूनियन कार्बाइड के लैंडफिलिंग विवाद में नया मोड़, हाईकोर्ट ने राहत दी

By Admin|23 Dec 2025, 4:01 PM
f X W

जबलपुर 
हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण से निकली राख की लैंडफिलिंग पर लगी रोक को अस्थाई रूप से वापस ले लिया है. लैंडफिलिंग पर लगाई गई रोक के आदेश पर समीक्षा करने सरकार की ओर से आवेदन दायर किया था. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक कुमार सिंह व जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने आवेदन की सुनवाई करते हुए पूर्व में पारित आदेश के अनुसार आगे कार्यवाही करने के निर्देश जारी किए हैं.

हाईकोर्ट ने लगाई थी लैंडफिलिंग पर रोक

इस याचिका की सुनवाई 2004 में आलोक प्रताप सिंह द्वारा लगाई गई याचिका के साथ संयुक्त रूप से हो रही थी. 2004 में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा था. वहीं, सोमवार से पहले हुई कई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से कचरे की विनष्टीकरण की रिपोर्ट पेश करने को कहा था. इसके बाद रिपोर्ट देखकर हाईकोर्ट ने राख को घनी आबादी के पास लैंडफिल किए जाने पर रोक लगा दी थी.

यूनियन कार्बाइड की राख पर हाईकोर्ट ने जताई थी चिंता

8 अक्टूबर 2025 को हाईकोर्ट ने कहा था कि जहरीले राख की लैंडफिलिंग के आदेश के बावजूद सरकार ने दूसरे स्थान के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी. सरकार द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किया गया है. राख अभी भी जहरीली है और अगर इसे ठीक से नहीं रोका गया तो भूकंप जैसी किसी प्राकृतिक आपदा के कारण उसे रोकने वाला स्ट्रक्चर गिरने पर एक और आपदा हो सकती है. ऐसे में राज्य सरकार को राख ऐसी जगहों पर ले जाने की संभावना पर विचार करना चाहिए जो इंसानी बस्तियों, पेड़-पौधों और पानी के सोर्स से बहुत दूर हों. कंटेनमेंट सिस्टम टूट भी जाए, तो भी इसके बुरे असर बहुत कम हों. हालांकि, अगली सुनवाई में इसे लेकर सरकार ने अपनी ओर से तर्क रखे.

READ ALSO  मध्य प्रदेश में डिजिटल परिवहन को बढ़ावा, ‘चलो’ ऐप से घर बैठे बुक करें सिटी बस का टिकट; जानें सुविधा के फायदे

दो महीने के अंदर पूरी करें विनष्टीकरण की प्रक्रिया : हाईकोर्ट

सरकार की ओर से इस मामले में फिर दलील दी गई कि जहरीली राख को रोकने के लिए जो स्ट्रक्चर बनाया है, उसे सबसे मॉडर्न सुरक्षा तकनीक से बनाया गया है. शुरुआत में कोर्ट राज्य सरकार की ओर से दिए गए इस तर्क से सहमत नहीं था. हालांकि, सोमवार को राज्य सरकार द्वारा आदेश पर समीक्षा करने के आवेदन पर युगलपीठ ने राहत दे दी.

हाईकोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि पूर्व में पारित आदेश को देखने व मामले के तथ्यातक पहलुओं पर विचार करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे है कि 8 अक्टूबर 2025 के आदेश को अस्थाई रूप से स्थगित रखा जाए. राज्य सरकार को न्यायालय के द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की राय के अधीन दो माह की अवधि के अंदर पूर्व में पारित आदेशानुसार विनष्टीकरण की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी.

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

2

Back to top button