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CG : अबूझमाड़ की पारुल को मिली नई ज़िंदगी : प्रोजेक्ट धड़कन बनी नन्ही धड़कनों का सहारा

By lokesh sharma|25 Apr 2026, 4:32 PM
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रायपुर, 

अबूझमाड़ की पारुल को मिली नई ज़िंदगी : प्रोजेक्ट धड़कन बनी नन्ही धड़कनों का सहारा

नारायणपुर जिले के दूरस्थ ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय पारूल दुग्गा अब फिर से मुस्कुरा रही है। कुछ समय पहले तक यह नन्हीं बच्ची जल्दी थक जाती थी, सामान्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी और परिवार उसकी सेहत को लेकर लगातार चिंतित रहता था। गांव के सीमित संसाधनों के बीच माता-पिता को यह भी पता नहीं था कि उनकी बच्ची के हृदय में गंभीर समस्या है। लेकिन जिले में शुरू किए गए “प्रोजेक्ट धड़कन” ने न केवल बीमारी की समय पर पहचान की, बल्कि पारूल को नया जीवन भी दे दिया।

नारायणपुर जिले में बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के उद्देश्य से फरवरी 2026 में “प्रोजेक्ट धड़कन” की शुरुआत की गई थी। इस विशेष अभियान का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों की हृदय संबंधी जांच कर गंभीर मामलों की शुरुआती अवस्था में पहचान करना है, ताकि समय रहते उनका उपचार कराया जा सके। खास बात यह है कि यह पहल उन सुदूर क्षेत्रों तक पहुंची, जहां पहले विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहद सीमित थी।

अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग की। प्रथम चरण में 3000 से अधिक बच्चों की जांच की गई। इस दौरान तीन बच्चों में हृदय रोग के संभावित लक्षण पाए गए। इनमें ब्रेहबेड़ा की पारूल दुग्गा भी शामिल थी।

जब पारूल के परिवार को बच्ची की बीमारी की जानकारी मिली तो चिंता बढ़ गई, लेकिन पहली बार उम्मीद भी जगी। प्रशासन ने तुरंत बेहतर इलाज की व्यवस्था की। प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने इन बच्चों को रायपुर स्थित सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के लिए रवाना किया और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

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रायपुर पहुंचने पर सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पारूल की विस्तृत जांच की। जांच में उसके हृदय में गंभीर समस्या की पुष्टि हुई, जिसके लिए ऑपरेशन आवश्यक बताया गया। परिवार के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय था, लेकिन जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा विशेषज्ञों के समन्वय से उपचार की पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित की गई।

10 अप्रैल 2026 को सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, रायपुर में पारूल की सफल हृदय सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में उसकी लगातार देखभाल की गई। 
आज पारूल अपने घर लौट चुकी है। वह  खेल रही है, मुस्कुरा रही है और परिवार की गोद में नई ऊर्जा के साथ पल रही है। वही अब परिवार के चेहरे पर सबसे बड़ी मुस्कान बन गई है।

कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि “प्रोजेक्ट धड़कन” का उद्देश्य केवल बीमारी की पहचान करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक उपचार दिलाना है। उन्होंने कहा कि जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले किसी भी बच्चे को स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में कठिनाई न झेलनी पड़े, इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है।
           उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम, चिकित्सकों, मैदानी कर्मचारियों और अभियान से जुड़े सभी अधिकारियों-कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल जिले में बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। आने वाले समय में और अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग कर संभावित मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

पारूल की कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है, जहां जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे गांवों तक संवेदनशील शासन पहुंच रहा है। यह उस भरोसे की कहानी है, जिसमें दूरस्थ परिवारों को भी विश्वास है कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
          “प्रोजेक्ट धड़कन” अब नारायणपुर में एक योजना भर नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद का नाम बन चुका है, जिनके लिए हर नन्हीं धड़कन सबसे कीमती है।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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