मध्य प्रदेशराज्‍य

कर्नल सोफिया विवाद में विजय शाह पर केस का रास्ता बंद, सरकार ने अभियोजन की मंजूरी देने से किया इनकार

By Admin|03 Sep 2026, 5:05 PM
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भोपाल
 मध्य प्रदेश सरकार ने सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में अपने कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से साफ इनकार कर दिया है।मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए इस फैसले पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने भी अपनी मुहर लगा दी है। सरकार अब इस फैसले के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना पांच सूत्रीय जवाब दाखिल करने की तैयारी कर रही है।

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राज्यपाल की मंजूरी के बाद तैयार सरकारी जवाब में पहला तर्क दिया गया है कि विजय शाह के बयान के बाद किसी भी व्यक्ति ने उनके खिलाफ कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई।सरकार की दलील है कि मंत्री ने अपने पूरे बयान में कहीं भी कर्नल सोफिया कुरैशी के नाम का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया था।

सरकार ने क्या वजह बताई
सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि विजय शाह की टिप्पणी के बाद किसी भी व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई। सरकार का यह भी कहना है कि शाह ने अपने बयान में कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम नहीं लिया था। उन्होंने अपनी टिप्पणी के लिए कई बार माफी मांगी और उनका किसी का अपमान करने का इरादा नहीं था।सरकार ने यह भी दावा किया है कि शाह की टिप्पणी से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित नहीं हुआ और न ही ऐसा करने की उनकी मंशा थी।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
बीते सोमवार को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी अपनी जांच पूरी कर चुकी है। उन्होंने कहा था कि मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी। बताया जा रहा है कि सरकार जल्द ही अपना जवाब अदालत में पेश कर सकती है।

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क्या हुआ था
विजय शाह तब विवादों में आए थे, जब मई 2025 में उनका एक वीडियो सामने आया। जिसमें उन्होंने कथित रूप से कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए शाह की भाषा पर कड़ी नाराजगी जताई थी और पुलिस को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले को अपने पास ले लिया था और राज्य सरकार की ओर से गठित एसआईटी से जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह ने माफी मांगी थी। हालांकि, जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का रिकॉर्ड पेश नहीं करने पर फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि वह उसके धैर्य की परीक्षा न लें। इसके बाद शाह ने कई बार माफी मांगी।

सरकार के अनुसार, मंत्री का इरादा किसी को ठेस पहुंचाने या अपमानित करने का नहीं था और उनके इस बयान से समाज में कोई सांप्रदायिक सौहार्द नहीं बिगड़ा।जवाब में यह भी रेखांकित किया गया है कि विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने कई बार सार्वजनिक और लिखित रूप से माफी मांगकर खेद व्यक्त किया है।सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने बताया कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल ने अपनी जांच पूरी कर ली है।

 

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