उत्तर प्रदेशराज्‍य

‘सपा का ब्राह्मण विरोधी चेहरा फिर उजागर’ ,मायावती का अखिलेश यादव पर तीखा हमला

By Admin|15 May 2026, 3:11 PM
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लखनऊ

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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज के खिलाफ की गई टिप्पणी ने प्रदेश का सियासी पारा बढ़ा दिया है। इस मुद्दे पर अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने मोर्चा संभालते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव को कठघरे में खड़ा किया है। मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अखिलेश यादव को इस अभद्र टिप्पणी के लिए तत्काल ब्राह्मण समाज से माफी मांगनी चाहिए।

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि सपा के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा हाल ही में ब्राह्मण समाज को लेकर की गई अभद्र, अशोभनीय एवं आपत्तिजनक टिप्पणी से हर तरफ भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद भी यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि समाज के स्वाभिमान को गहरी ठेस पहुंची है।

अखिलेश की चुप्पी ने मामले को बनाया गंभीर
बसपा प्रमुख ने अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली सपा के नेतृत्व की इस मामले पर खामोशी बेहद चिंताजनक है। मायावती के अनुसार, सपा मुखिया की चुप्पी की वजह से यह विवाद और अधिक तूल पकड़ता जा रहा है और सामाजिक स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने सलाह दी कि सपा मुखिया को तत्काल इसका संज्ञान लेकर ब्राह्मण समाज से क्षमा याचना और पश्चाताप कर लेना चाहिए।

सपा का चरित्र 'ब्राह्मण विरोधी'
मायावती ने सपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि इस प्रकरण से एक बार फिर साबित हो गया है कि सपा का चरित्र नहीं बदला है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों, अति-पिछड़ों और मुस्लिम समाज की तरह सपा का 'ब्राह्मण विरोधी' चेहरा भी अब और गहरा होकर सामने आया है। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान सरकार (बीजेपी) पर भी निशाना साधा और कहा कि ब्राह्मण समाज में मौजूदा सरकार के रवैये को लेकर भी जबरदस्त नाराजगी है, जो किसी से छिपी नहीं है।

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बसपा में 'यूज एंड थ्रो' की राजनीति नहीं
ब्राह्मणों को अपनी ओर आकर्षित करते हुए मायावती ने बसपा के शासनकाल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि बसपा ने हमेशा सर्वसमाज की तरह ब्राह्मण समाज को भी पार्टी और सरकार में भरपूर आदर-सम्मान दिया है। बसपा में 'यूज एंड थ्रो' (इस्तेमाल करो और फेंको) की राजनीति नहीं होती, बल्कि यहाँ सर्वसमाज का हित हमेशा सुरक्षित रहा है।

गौरतलब है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में मायावती ने अकेले ही उतरने का ऐलान किया है। 2007 की तरह दलित ब्राह्मण गठजोड़ पर मायावती की नजरें हैं। पिछले दिनों प्रेस कांफ्रेंस कर उन्होंने ब्राह्मण समाज को बसपा से जोड़ने के लिए कई ऐलान भी किए थे।

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