मध्य प्रदेश

1984 दंगे मामले में नई हलचल: कमलनाथ पर याचिका, अदालत ने केंद्र और पुलिस को नोटिस भेजा

By Admin|18 Nov 2025, 9:02 PM
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नई दिल्ली/भोपाल
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को शहर के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की उस याचिका पर केंद्र और पुलिस से जवाब मांगा, जिसमें 1984 में गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में हुए दंगे के दौरान कांग्रेस नेता कमलनाथ की मौजूदगी का कथित तौर पर उल्लेख करने वाली एक पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट पेश करने का अनुरोध किया गया है। न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने याचिका पर पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और उन्हें सुनवाई की अगली तारीख 15 जनवरी 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा। याचिका में अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस आयुक्त गौतम कौल द्वारा तत्कालीन पुलिस आयुक्त को सौंपी गई रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लायें, जिसमें ‘‘स्पष्ट रूप से अपराध स्थल यानी गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में कमलनाथ की उपस्थिति को दर्शाया गया है।''

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एच एस फुल्का ने दलील दी कि अपराध स्थल पर कमलनाथ की मौजूदगी पुलिस रिकॉर्ड में अच्छी तरह दर्ज है, इसके अलावा कई समाचार पत्रों ने घटना के समय और स्थान पर उनकी मौजूदगी का उल्लेख किया है, लेकिन सरकार ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में इन पहलुओं पर विचार नहीं किया। यह अर्जी सिरसा की मुख्य याचिका के साथ दाखिल की गयी थी, जिसमें 1984 के सिख-विरोधी दंगों से संबंधित मामले में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की कथित भूमिका के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। इससे पहले, उच्च न्यायालय ने 27 जनवरी 2022 को विशेष जांच दल (एसआईटी) को याचिका पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।

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सिरसा ने 2022 में दायर याचिका में कमलनाथ को बिना किसी और देरी के गिरफ्तार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। उन्होंने यहां संसद मार्ग थाने में 1984 में दर्ज प्राथमिकी में कमलनाथ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एसआईटी को निर्देश देने का अनुरोध किया था। इस मामले में पांच लोगों को आरोपी बनाया गया था। सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया गया। हालांकि, कमलनाथ का नाम कभी भी प्राथमिकी में दर्ज नहीं था। यह मामला गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में दंगाइयों की भीड़ के घुसने से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि कथित तौर पर कमलनाथ के नेतृत्व वाली भीड़ ने गुरुद्वारे के परिसर में दो सिखों इंद्रजीत सिंह और मनमोहन सिंह को ज़िंदा जला दिया था। कमलनाथ ने इन आरोपों से इनकार किया है।
 
सितंबर 2019 में एसआईटी ने सिख-विरोधी दंगों के सात मामलों को फिर से खोलने का फैसला किया था, जिनमें आरोपियों को या तो बरी कर दिया गया था या मुकदमा बंद कर दिया गया था। इसके बाद सिरसा ने दावा किया था कि कमलनाथ ने सात मामलों में से एक के पांच आरोपियों को कथित तौर पर शरण दी थी। गौरतलब है कि 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद सिख-विरोधी दंगे भड़क उठे थे। 

 

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