मध्य प्रदेश

MP से बासमती निर्यात पर असर, समुद्र में फंसा चावल, किसानों और व्यापारियों को हुई भारी चिंता

By Admin|20 Mar 2026, 10:01 AM
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भोपाल 

मध्य पूर्व में लगातार गहराते तनाव और इजरायल-ईरान-अमेरिका के बीच बन रहे युद्ध जैसे हालातों का सीधा और गंभीर असर भारत के कृषि निर्यात, विशेषकर बासमती चावल के कारोबार पर दिखाई देने लगा है. खाड़ी देशों में पैदा हुए इस भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Crisis) के कारण भारत से होने वाला बासमती का निर्यात लगभग पूरी तरह से ठप पड़ गया है. हालात ये हैं कि देश का करीब 4 लाख टन प्रीमियम बासमती चावल बीच समुद्र में जहाजों पर या विभिन्न बंदरगाहों (पोर्ट) पर अनिश्चितकालीन स्थिति में फंसा हुआ है।

खाड़ी देशों में इन किस्मों की है भारी मांग
मध्य प्रदेश से, विशेषकर रायसेन जिले से बासमती चावल का बड़े पैमाने पर ईरान समेत कई खाड़ी देशों में निर्यात होता है. इन देशों में बासमती सेला 1509, 1121, सुगंधा और शरबती जैसे चावलों की भारी डिमांड रहती है. लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालातों के चलते पिछले कुछ दिनों से एक्सपोर्ट पूरी तरह रुक गया है और जहाजों के कंसाइनमेंट बीच रास्ते में ही फंस गए हैं।

2000 डॉलर का शिपिंग खर्च 9000 डॉलर पहुंचा
रायसेन जिले में स्थित 'अपर्णा फूड मिल एसोसिएशन' के अध्यक्ष ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के कारण बासमती चावल के एक्सपोर्ट पर टैक्स और लागत बेतहाशा बढ़ गई है. समुद्री रास्तों, खासकर लाल सागर (Red Sea) रूट पर बनी अस्थिरता के चलते शिपिंग लाइनों के किराए में भारी उछाल आया है. पहले जहां एक कंटेनर का शिपिंग खर्च लगभग 2000 डॉलर हुआ करता था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 9000 डॉलर प्रति कंटेनर तक पहुंच गया है।

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मिलर्स पर मंडरा रहा भारी नुकसान का खतरा
लगातार बढ़ती लागत, बढ़े हुए टैक्स और रास्ते में फंसे माल के कारण एक्सपोर्ट कारोबार लगभग ठप होने की कगार पर पहुंच गया है. व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द ही अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं हुए और समुद्री रास्ते सुरक्षित नहीं हुए, तो बासमती चावल उद्योग से जुड़े किसानों, मिलर्स और व्यापारियों को एक बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. फिलहाल, पूरे बाजार की नजरें मध्य पूर्व के हालातों पर टिकी हुई हैं।

31 मार्च की क्लोजिंग से व्यापारियों पर दबाव

31 मार्च के आसपास वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग होती है। ऐसे समय में व्यापारियों और बैंकों को अपने हिसाब-किताब पूरे करने होते हैं, लेकिन निर्यात रुकने से व्यापारियों पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। माल बंदरगाहों और गोदामों में अटकने से बासमती की कीमतों पर भी असर पड़ रहा है। गोयल के अनुसार भारत से होने वाले बासमती चावल निर्यात का करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा और पंजाब से जाता है। इसलिए इस संकट का सबसे ज्यादा असर भी इन राज्यों के राइस मिलर्स और व्यापारियों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि एक बड़ी राइस मिल में करीब 200 मजदूर काम करते हैं, जिनमें से अधिकतर बिहार और उत्तर प्रदेश के होते हैं। सतीश गोयल ने बताया कि एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल सरकार से दो बार मिल चुका है। उन्होंने मांग की है कि बढ़े हुए फ्रेट और इंश्योरेंस का बोझ सरकार वहन करे या राहत दे। बंदरगाहों पर खड़े कंटेनरों पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क को माफ किया जाए।

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