मध्य प्रदेश

भोपाल में बच्चों में डायबिटीज का खतरा, GMC और AIIMS में मरीजों की संख्या बढ़ी, नया कोर्स शुरू

By Admin|14 Nov 2025, 3:34 PM
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भोपाल 

 मधुमेह अब बच्चों को भी अपने गिरफ्त में ले रहा है। छोटे बच्चों में भी टाइप-1 व टाइप-2 डायबिटीज के मामले आ रहे हैं। हर रोज जीएमसी, एम्स भोपाल और जेपी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले बच्चों का आंकड़ा बढ़ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार करीब दो प्रतिशत बच्चे टाइप-2 डायबिटीज के मरीज हैं। बच्चों में मधुमेह का अटैक पिछले पिछले चार-पांच वर्षों में तेजी से बढ़ा है। इस गंभीरता को समझते हुए एम्स,भोपाल में पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजी कोर्स शुरू करना पड़ा है।

टाइप-1, टाइप-2 के जोखिम कारक

टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइयून बीमारी है, जिसमें शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है, जबकि टाइप-2 डायबिटीज जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है, जो मोटापा, निष्क्रियता, असंतुलित आहार और पारिवारिक इतिहास से बढ़ रही है। बीमारी उन बच्चों में ज्यादा देखी जा रही जो मैदान की जगह मोबाइल पर खेलते हैं। खेल उनकी दिनचर्या से नदारद है। स्क्रीन टाइम सीमित करने और स्कूलों में शुगर बोर्ड जागरुकता अभियान चलाकर इसे कम कर सकते हैं।

बदलती जीवनशैली बनी खतरा

चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों और युवाओं में जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड फूड और निष्क्रिय जीवनशैली डायबिटीज का प्रमुख कारण है। मोटापा और अधिक चीनी का सेवन इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

राजधानी में सीमित जांच सुविधाएं

भोपाल के सरकारी अस्पतालों में जांच सुविधाएं सीमित हैं। सरकारी लैब में एचबीएएलसी जांच के लिए सप्ताह भर इंतजार करना पड़ता है। ऊपर से जागरुकता की भी कमी है।

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