उत्तर प्रदेशराज्‍य

उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार होगा कुशल कार्यबल, सिंगापुर मॉडल से प्रेरित होगी प्रशिक्षण व्यवस्था

By Admin|09 Jun 2026, 10:36 PM
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लखनऊ

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र (एसवीबीपीईआईजेड) परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को परियोजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी युवा शक्ति का प्रदेश है। तेजी से बढ़ते निवेश, विस्तार ले रहे उद्योगों और बदलती तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए राज्य को ऐसे संस्थागत ढांचे की जरूरत है जो युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से सीधे जोड़ सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण की व्यवस्था उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि युवाओं को कौशल प्राप्त करने के बाद रोजगार के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना को केवल प्रशिक्षण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार, उद्योग और उद्यमिता के समेकित इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाए।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आने वाले वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता को देखते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एवं एम्प्लायमेंट जोन की अवधारणा तैयार की गई है। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

बैठक में नौ क्षेत्रीय जोनों की प्रस्तावित हब एवं स्पोक संरचना प्रस्तुत की गई। प्रत्येक जोन में एक उत्कृष्टता केंद्र (हब) तथा उससे जुड़े क्षेत्रीय कौशल विकास केंद्र (स्पोक) विकसित किए जाएंगे। हब स्तर पर उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षक प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और कैरियर सेवाओं का संचालन होगा, जबकि क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम स्पोक केंद्रों के माध्यम से संचालित किए जाएंगे।

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परियोजना के तहत कौशल विकास केंद्र, औद्योगिक भूखंड, प्लग एंड प्ले औद्योगिक सुविधाएं, साझा सुविधा केंद्र, रोजगार सहायता तंत्र, व्यावसायिक सेवाएं, विदेशी भाषा प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम तथा उद्यमिता सहायता सुविधाएं एक ही परिसर में विकसित की जाएंगी। इससे युवाओं को प्रशिक्षण से लेकर रोजगार प्राप्त करने और स्वयं का उद्यम स्थापित करने तक की पूरी प्रक्रिया के लिए एकीकृत व्यवस्था उपलब्ध होगी।

बैठक में बताया गया कि परियोजना के प्रथम चरण के लिए मऊ, कानपुर देहात, कन्नौज, रायबरेली, प्रतापगढ़ तथा कानपुर नगर में कुल 369 एकड़ भूमि उपलब्ध है। अन्य जिलों के लिए भी भूमि की उपलब्धता हो रही है। 

बैठक में बताया गया कि परियोजना के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण एवं प्रमाणन उपलब्ध कराया जा सकेगा। प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक रोजगार मिलान (जॉब मैचिंग) का लक्ष्य रखा गया है, जबकि प्रशिक्षित युवाओं के लिए 80 प्रतिशत प्लेसमेंट सुनिश्चित करने की योजना है। इसके अतिरिक्त प्रतिवर्ष दो लाख से अधिक नए एमएसएमई उद्यमों को प्रोत्साहन मिलने तथा लगभग 50 हजार गिग वर्कर्स को औपचारिक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बैठक में बताया गया कि सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (ITE) और उसकी नॉलेज पार्टनर संस्था ITEES के अनुभवों का उपयोग किया जाएगा। यह संस्था विश्व के अनेक देशों में तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रणालियों के विकास में सहयोग कर चुकी है। पाठ्यक्रम विकास, क्षमता निर्माण, गुणवत्ता आश्वासन, मूल्यांकन, नेतृत्व विकास और प्रशिक्षण अवसंरचना के निर्माण में उसकी विशेषज्ञता का लाभ प्रदेश को मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि उपलब्धता, संस्थागत संरचना, निजी क्षेत्र की भागीदारी तथा क्रियान्वयन मॉडल से संबंधित प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय लेते हुए परियोजना को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया जाए।

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