कवर्धा जिलाछत्तीसगढ़

CG : बैगा संस्कृति को सहेजने की अनूठी पहल, बच्चों को मिला बीरन हस्तशिल्प का प्रशिक्षण …

By kadwaghut|14 Sep 2026, 4:13 PM
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कवर्धा । कबीरधाम जिले में विशेष संरक्षित बैगा जनजाति की प्राचीन और पारंपरिक कला ‘बीरन हस्तशिल्प’ को नई पहचान और आजीविका से जोड़ने का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार तथा जिला प्रशासन कबीरधाम के समन्वय से शासकीय आत्मानंद हिंदी माध्यम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कवर्धा में 31 अगस्त से 2 सितंबर तक तीन दिवसीय कार्यात्मक प्रशिक्षण सह प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

ग्राम बांटीपथरा के आश्रित ग्राम छिंदपुर की प्रख्यात बैगा महिला शिल्पकार श्रीबाई बैगा ने स्कूली बच्चों को पारंपरिक ‘बीरन माला’ बनाने का व्यावहारिक और बारीकी से प्रशिक्षण दिया।

प्रकृति और संस्कृति का संगम है बीरन माला
बैगा समुदाय में ‘बीरन’ को प्रकृति और संस्कृति का अभूतपूर्व संगम माना जाता है। विशेष संरक्षित बैगा जनजाति के लोग हजारों वर्षों से इसका उपयोग अपने पारंपरिक श्रृंगार और सांस्कृतिक उत्सवों में करते आ रहे हैं। यह अनूठी माला ‘सूताखड़’ नामक घांस और पारिजात वृक्ष की टहनी से तैयार की जाती है। अपनी अनूठी बनावट के कारण इसकी ख्याति देश सहित विदेशों में भी बढ़ रही है। हाल ही में आईपीएल (IPL) क्रिकेट खिलाड़ियों का स्वागत भी इसी पारंपरिक बीरन माला से किया गया था।

बच्चों ने दिखाई गहरी रुचि
कार्यशाला के दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह के साथ बीरन हस्तशिल्प की कला को सीखा। प्रशिक्षण के दौरान चार बच्चों ने इसमें काफी हद तक दक्षता भी हासिल कर ली है। निरंतर मार्गदर्शन मिलने पर वे इसमें पूरी तरह दक्ष हो सकते हैं।

सांस्कृतिक संरक्षण के साथ आजीविका के नए आयाम
जिला प्रशासन कबीरधाम एवं स्थानीय संस्था ग्रामोदय बैगा समुदाय के साथ मिलकर बीरन हस्तशिल्प को संरक्षित करने में जुटे हैं। इस तरह के आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे ईको-फ्रेंडली हस्तशिल्प आभूषण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थायी रोजगार और आजीविका के नए आयाम स्थापित होंगे।

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