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CG : पहाड़ी कोरवा मंझनीन बाई करती है अस्पताल में सेवा, जिंदगी हुई खुशहाल

By lokesh sharma|13 Oct 2025, 11:36 PM
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अजगरबहार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में है कार्यरत

रायपुऱ,

अजगरबहार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में है कार्यरत
अजगरबहार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में है कार्यरत
अजगरबहार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में है कार्यरत

छत्तीसगढ़ के घने जंगलों और पहाड़ों के बीच बसे कोरबा जिले से एक प्रेरक कहानी सामने आई है- यह कहानी है पहाड़ी कोरवा जनजाति समाज की मंझनीन बाई की, जिन्हें लोग ‘राष्ट्रपति के दत्तक पुत्री समाज‘ की प्रतिनिधि के रूप में जानते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन कोरबा ने डीएमएफ फंड के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति के शिक्षित परिवारों को रोजगार से जोड़ने का महत्वपूर्ण कदम उठाया, जिसका परिणाम परिलक्षित हो रहा है।

मंझनीन बाई अज़गरबहार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत

मंझनीन बाई को ग्राम अज़गरबहार स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में मानदेय आधार पर नियुक्ति दी गई। उनके पति किनारे लाल, जो स्वयं दसवीं पास हैं, को भी इसी योजना के तहत पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के हाई स्कूल एतमानगर में भृत्य के पद पर नियुक्ति मिली। अब दोनों पति-पत्नी आत्मनिर्भर हैं और अपने बच्चों व परिवार के लिए एक बेहतर भविष्य गढ़ रहे हैं। वह अब नियमित अस्पताल आती है। यहाँ नौकरी ने उनकी जिंदगी में खुशहाली ला दी है।

मंझनीन बाई पहाड़ी कोरवाओं के लिए प्रेरणा बनी स्रोत

कोरबा ब्लॉक के ग्राम टोकाभांटा की मंझनीन बाई का जीवन संघर्षों से भरा रहा। वे एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ीं जहाँ जंगल ही जीवन का सहारा था। वन उपज एकत्र कर ही उनका परिवार गुज़ारा करता था। शिक्षा के लिए संसाधनों की कमी थी, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कक्षा दसवीं तक अध्ययन पूरा किया। यही पढ़ाई आगे चलकर उनके जीवन में परिवर्तन की कुंजी बनी। मंझनीन बाई बताती हैं -‘पहले हमारा जीवन बहुत कठिन था। जंगलों में वनोपज पर निर्भर रहना पड़ता था। रोज़ी-रोटी की चिंता हमेशा बनी रहती थी। लेकिन अब जब हमें नौकरी मिली है, तो जीवन में स्थिरता और सम्मान दोनों आए हैं। दो साल से काम कर रही हूँ और अब भविष्य के प्रति विश्वास बढ़ गया है।‘ उनके परिवार में माता-पिता, पाँच बहनें और दो भाई हैं। मंझनीन बाई अब अपने समाज के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि परिस्थितियाँ चाहे जितनी भी कठिन क्यों न हों, शिक्षा और दृढ़ निश्चय से हर बाधा को पार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उन्हें हर माह 9000 रूपए मानदेय के रूप में मिलता है। 

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विशेष पिछडी जनजाति के 43 परिवार के जीवन में प्रशासन ने भरा उजाला

प्रशासन के इस प्रयास ने न केवल एक परिवार के जीवन में उजाला भरा है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि विकास की असली रोशनी तब तक पूर्ण नहीं होती, जब तक वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक न पहुँचे। स्थानीय पहाड़ी कोरवाओं को रोजगार का अवसर मिलने के बाद समाज में उन परिवारों को भी प्रेरणा मिली है जो स्कूली शिक्षा से दूर हो जाते थे, अब वे परिवार भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने लगे हैं। जिले में कलेक्टर कोरबा के मार्गदर्शन में पीवीटीजी के 43 लोगों को स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी में मानदेय पर डीएमएफ से नियुक्ति की गई है।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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