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बोरवेल खुला छोड़ा तो होगी जेल, अफसरों के लिए भी तय हुई समय सीमा; MP में सख्त नियम लागू

By Admin|19 Jun 2026, 9:06 AM
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भोपाल 

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मध्य प्रदेश सरकार ने खुले और असुरक्षित बोरवेल से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों पर अमल करते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग ने बोरवेल सुरक्षा को लेकर एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है. इस नई व्यवस्था का मकसद बोरवेल से जुड़े खतरों को कम करना और लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। 

खुला बोरवेल छोड़ना पड़ेगा भारी
नई SOP के अनुसार किसी भी व्यक्ति या संस्था को बिना मंज़ूरी के नया बोरवेल खोदने की इजाज़त नहीं होगी. निर्माण से पहले संबंधित विभाग से जरूरी मंजूरी लेना अनिवार्य है. इसके अलावा अगर इस्तेमाल के बाद बोरवेल को खुला छोड़ दिया जाता है या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता है, तो ज़िम्मेदार व्यक्ति के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इन नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और जेल, दोनों का प्रावधान किया गया है। 

खुले बोरवेल की शिकायत अब ऐप से करें
इसके अलावा सरकार ने लोगों की भागीदारी बढ़ाने और निगरानी को मजबूत करने के लिए 'PARAKH' ऐप भी लॉन्च किया है. इस ऐप के जरिए नागरिक खुले, छोड़े गए या खतरनाक बोरवेल की जानकारी सीधे प्रशासन को दे सकते हैं. शिकायत मिलने पर संबंधित विभाग तुरंत जांच करेगा और कार्रवाई करेगा. सरकार को उम्मीद है कि इस नए सिस्टम से बोरवेल से जुड़े हादसों में कमी आएगी और सुरक्षा के मामले में जवाबदेही तय होगी। 

नया बोरवेल खोदने से पहले रजिस्ट्रेशन और अनुमति अनिवार्य होगी, जबकि खुले या सूखे बोरवेल को समय सीमा में बंद नहीं करने पर जुर्माने के साथ जेल की कार्रवाई भी की जाएगी। हादसा होने पर रेस्क्यू ऑपरेशन का खर्च भी संबंधित जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी से वसूला जाएगा।

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90 दिन में बोरवेल बंद कर पोर्टल पर डालना होगा फोटो
अब तक बोरवेल हादसों में सिर्फ मामूली धाराओं में कार्रवाई होती थी, लेकिन अब नियम बेहद सख्त कर दिए गए हैं। नए नियम के तहत यदि बोरवेल में पानी नहीं निकलता है तो जमीन मालिक को 90 दिनों के भीतर उसे मिट्टी या कंक्रीट से स्थायी रूप से बंद करना होगा और उसकी फोटो पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

पहली बार 10 हजार, दूसरी बार 25 हजार जुर्माना
पहली बार लापरवाही पर 10,000 और दूसरी बार पकड़े जाने पर 25,000 रुपए का जुर्माना व जेल होगी। यदि खुला बोरवेल मिलने पर कोई दुर्घटना होती है तो मकान/जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी पर सीधे FIR दर्ज होगी। यही नहीं, रेस्क्यू ऑपरेशन में आने वाला लाखों का खर्च भी दोषी से ही वसूला जाएगा।

'परख एप' (PARAKH) से सीधे शिकायत कर सकेंगे
नागरिक अपने आस-पास खुले पड़े बोरवेल की फोटो खींचकर इस एप पर शिकायत कर सकते हैं। सरकारी जमीन पर लापरवाही मिलने पर अफसरों पर भी कार्रवाई होगी।

बोरवेल में गिरने से कई मासूमों की जा चुकी है जान 
बता दें कि पिछले कुछ सालों में मध्य प्रदेश में खुले और असुरक्षित बोरवेल की वजह से कई मासूम बच्चों की जान गई है. सीहोर, विदिशा, सागर, रीवा और राजगढ़ जैसे जिलों में बच्चों के बोरवेल में गिरने की घटनाओं ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया था. कई मामलों में घंटों या दिनों तक बचाव अभियान चलाने पड़े, फिर भी कुछ बच्चों को बचाया नहीं जा सका. इन दुखद घटनाओं के बाद सरकार ने बोरवेल की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है. अब बिना मंजूरी के बोरवेल खोदने और बोरवेल को खुला छोड़ने के काम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सरकार का मानना ​​है कि नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और मॉनिटरिंग सिस्टम से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। 

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तीन दिन में फाइल नहीं भेजी तो कार्रवाई

नए हैंडपंप लगाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए हर स्तर पर टाइम लाइन तय कर दी गई है।

    3 दिन में भेजना होगी फाइल: आवेदन मिलते ही कार्यपालन यंत्री को 3 कार्यदिवस के भीतर फाइल सहायक यंत्री को भेजनी होगी।

    3 दिन में मौका ए मुआयना: उपयंत्री (Sub-Engineer) 3 दिन के अंदर गांव जाकर गूगल मैप और 'घन' पोर्टल की मदद से जगह की मार्किंग करेंगे।

    1 हफ्ते में अंतिम रिपोर्ट: सारी रिपोर्ट मिलने के बाद 1 सप्ताह के भीतर कार्यपालन यंत्री कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति के सामने प्रस्ताव रखेंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए क्या है खास?

    पानी की उपलब्धता को प्राथमिकता: जिन गांवों में नल कनेक्शन नहीं हैं और 300 मीटर के दायरे में प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी नहीं मिल रहा है, वहां विभाग खुद नया बोरवेल खोदेगा।

    बजट की कमी नहीं बनेगी रोड़ा: अगर सरकारी बजट कम पड़ता है तो कलेक्टर की सहमति से विधायक निधि, सांसद निधि या खनिज मद से पैसा PHE विभाग को ट्रांसफर किया जा सकेगा।

    कारण बताना होगा अनिवार्य: यदि जिला समिति ग्रामीणों की हैंडपंप की मांग को खारिज करती है तो विभाग को लिखित में कारण बताना होगा कि आवेदन क्यों रिजेक्ट हुआ।

शुद्ध पानी की गारंटी और नया विकल्प

    जांच के बाद ही मिलेगा पानी: नया हैंडपंप खोदने के बाद पानी का सैंपल सरकारी लैब भेजा जाएगा। BIS मानकों के तहत पानी शुद्ध होने और कीटाणुशोधन (Bleaching) के बाद ही इसे जनता को सौंपा जाएगा।

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    सिंगल फेज मोटरपंप का विकल्प: जहां पानी का स्तर ज्यादा गहरा है और हैंडपंप काम नहीं कर सकता, वहां ग्राम पंचायत की सहमति से सिंगल फेज मोटरपंप लगाया जा सकेगा, जिसका रख-रखाव पंचायत करेगी।

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