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जनगणना 2026 में सख्ती: किचन-बाथरूम से लेकर वाहनों तक की जानकारी होगी अनिवार्य

By Admin|20 Apr 2026, 5:31 PM
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अररिया.

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जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां अब तेज हो गई हैं। इस बार की जनगणना पहले से ज्यादा आधुनिक और डिजिटल होगी। इसके लिए सिकटी में 16 से 24 अप्रैल तक जनगणना करने वाले प्रगणक एवं पर्यवेक्षकों का प्रखंड स्तरीय चयनित तीन केंद्रों पर 6 मास्टर ट्रेनरों द्वारा प्रशिक्षण जारी है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार के अनुसार प्रगणक घर-घर जाकर लोगों से 33 महत्वपूर्ण सवाल पूछेंगे, जिनके आधार पर देश और राज्य की विकास योजनाओं की नई रूपरेखा तैयार की जाएगी। खास बात यह है कि इस बार लोग खुद भी ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। 17 अप्रैल से 1 मई 2026 तक स्व-गणना का विकल्प दिया गया है, जबकि दो मई से 31 मई तक प्रगणक हर घर पहुंचकर जानकारी जुटाएंगे।

घर की कहानी भी, परिवार की जुबानी भी
इस जनगणना में सिर्फ लोगों की गिनती ही नहीं होगी, बल्कि घर की पूरी कहानी दर्ज की जाएगी। मकान की दीवार, छत और फर्श किस सामग्री के बने हैं, घर खुद का है या किराये का, कितने कमरे हैं, ऐसी बारीक जानकारी भी ली जाएगी।
पानी कहां से आता है, शौचालय है या नहीं, किस तरह का है, खाना किस ईंधन से बनता है- एलपीजी, लकड़ी या अन्य साधन – ये सभी सवाल पूछे जाएंगे। यहां तक कि घर में स्नानघर और रसोईघर की उपलब्धता भी दर्ज की जाएगी।

मोबाइल, इंटरनेट और गाड़ियों का भी होगा हिसाब
डिजिटल दौर को देखते हुए इस बार घर में उपलब्ध सुविधाओं का भी पूरा ब्योरा लिया जाएगा। टीवी, इंटरनेट, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, साइकिल, बाइक या कार जैसी चीजों की जानकारी भी प्रगणक जुटाएंगे। एक मोबाइल नंबर भी लिया जाएगा, जो सिर्फ जनगणना कार्य के लिए उपयोग होगा। परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, जाति, परिवार के सदस्यों की संख्या और घर में रहने वाले विवाहित परिवारों की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इससे सरकार को समाज की वास्तविक तस्वीर समझने में मदद मिलेगी।

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सही जवाब देना है जरूरी:
अधिकारियों ने साफ किया है कि जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत सभी 33 सवालों का सही उत्तर देना अनिवार्य है। गलत जानकारी देने पर कार्रवाई भी संभव है।

क्यों है यह जनगणना खास?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस जनगणना से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। यही आंकड़े आने वाले वर्षों की नीतियों की दिशा तय करेंगे।

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