मध्य प्रदेश

तारिखों की लंबी लाइन को तोड़ते हुए, एमपी हाई कोर्ट दे रहा है तुरंत न्याय

By Admin|28 Sep 2025, 5:46 PM
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जबलपुर

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हाई कोर्ट को चार लाख 82 हजार 627 कुल लंबित मुकदमों के बोझ से निजात दिलाने युद्ध स्तर पर प्रयास जारी है। इस अभियान के अंतर्गत निरंतर दूसरे शनिवार को 8 विशेष पीठों ने 296 प्रकरणों का निराकरण करने का आदर्श प्रस्तुत किया। 8 विशेष पीठों ने जमानत अर्जियों को सुना। शेष दो नियमित पीठों के समक्ष सर्विस व अवमानना के प्रकरण सुने गए।

दरअसल, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के निर्देश पर इन विशेष पीठों का गठन किया गया है। शनिवार को आठ विशेष पीठों ने 866 जमानत के मामलों पर सुनवाई की। इनमें से से 296 मामले निराकृत कर दिए गए। वहीं, सेवा संबंधी मामलों की सुनवाई कर रही दोनों बेंचों ने 41 मामलों का निराकरण किया। इस तरह एक दिन में ही 337 लंबित मामलों का पटाक्षेप कर दिया गया। जबकि पहले शनिवार को आठ विशेष बेंच में 864 मामले सुनवाई के लिए रखे गए थे, जिनमें से 350 प्रकरणों का निराकरण किया गया था।

इन जजों ने सुनी जमानत अर्जियां

जज – कुल आवेदन सुने – निराकृत

न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा – 115 – 55

न्यायमूर्ति एमएस भट्टी – 149- 51

न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल- 138 – 33

न्यायमूर्ति दीपक खोत – 126 – 33

न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी – 103 – 33

न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे – 84- 32

न्यायमूर्ति रत्नेशचंद्र सिंह बिसेन- 48- 14

न्यायमूर्ति बीपी शर्मा – 102 – 45

सर्विस मैटर्स के लिए बैठी ये बेंच

जस्टिस डीडी बंसल- 92 – 04

जस्टिस विवेक जैन- 109- 37

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कुल मामलों पर सुनवाई – 866

निराकृत मामले – 337

द्रुतगति से बढ़ रहे लंबित मामलों को गंभीरता से लिया गया

हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन व सचिव परितोष त्रिवेदी के अनुसार उन्होंने मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा को बताया था कि मुख्यपीठ में इस वर्ष दायर की गई व लंबित जमानत अर्जियों का आंकड़ा तीन हजार के पास पहुंच गया है। सर्विस मैटर्स का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ रहा है। इसको लेकर वकीलों में पिछले कुछ समय से असंतोष व्याप्त है। इस संबंध में ठोस कदम उठाने का आग्रह किया था।

इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सचदेवा ने द्रुतगति से बढ़ रहे लंबित मामलों को गंभीरता से लेते हुए नवीन व्यवस्था दे दी। विगत 20 सितंबर को जमानत के मामलों के लिए आठ विशेष बेंच गठित की थीं। इस बार दो बेंच सर्विस मैटर्स के लिए भी बैठीं। जैन ने कहा कि हाई कोर्ट की यह पहल सराहनीय है। इससे बड़ी संख्या में पक्षकारों को राहत मिली। सामान्य कार्य दिवसों की तरह इनमें पक्षकार, वकील, कर्मचारी व अधिकारी शामिल रहे।

एक वर्ष में 50 हजार केस निपटाने का लक्ष्य
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चार लाख 82 हजार 627 केस लंबित हैं। इसमें 2,86,172 मामले सिविल और 1,96,455 क्रिमिनल के हैं। कुल क्रिमिनल मामलों में शून्य से 10 साल पुराने 1,34,524 केस, 11 से 25 साल पुराने 59,424 केस और 25 साल से भी ज्यादा पुराने केसों की संख्या 2,507 है। हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर में तीन हजार मामले अकेले जमानत अर्जियों से जुड़े हैं, जो महीनों से लंबित हैं।

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भोपाल, इंदौर और ग्वालियर की तीनों पीठों में कुल 53 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या है, कार्यरत 43 हैं। अनुमान है कि 10 जजों की स्पेशल बेंच एक साल में 30 से 50 हजार से अधिक मामलों का निपटारा कर सकती है। सभी बेंचें एमसीआरसी यानी क्रिमिनल मामलों, आदेश, एडमिशन और अंतिम सुनवाई पर विचारण करेंगी।

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