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नवल टाटा अकादमी के खिलाड़ी चमके, जापान में भारत की ऐतिहासिक जीत

By Admin|19 Jun 2026, 9:31 PM
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जमशेदपुर
 पसीने की स्याही से जब किस्मत लिखी जाती है, तो मुफलिसी की दीवारें भी रास्ता छोड़ देती हैं। झारखंड के खूंटी जिले की लाल मिट्टी से निकले दो युवा खिलाड़ी प्रेमचंद सोरेन और आशीष तानी पूर्ति ने इस कहावत को सच कर दिखाया है।

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अभावों की भट्टी में तपकर कुंदन बने नवल टाटा हॉकी अकादमी (एनटीएचए) के इन दोनों खिलाड़ियों ने जापान में आयोजित अंडर-18 पुरुष एशिया कप में भारत को स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रच दिया है।

कच्चे मकान और गरीबी की बेड़ियों को तोड़कर अंतरराष्ट्रीय पटल पर छा जाने वाले ये दोनों हॉकी सनसनी आज देश की धड़कन बन चुके हैं।

सफलता के इस शिखर पर पहुंचकर दोनों खिलाड़ी भावुक हो उठते हैं। अपने संघर्षों को याद करते हुए दोनों के मुख से बरबस ही निकल पड़ता है, अगर टाटा ट्रस्ट और नेवल टाटा हॉकी अकादमी (एनटीएचए) का संबल न मिलता, तो हमारी स्टिक खेतों की पगडंडियों में ही टूटकर खो जाती। एनटीएचए की विश्वस्तरीय सुविधाओं और मार्गदर्शन ने ही हमारे सपनों को परवाज दी है।

प्लास्टिक की छत से नीले आसमान की उड़ान
खूंटी के मुरहू प्रखंड स्थित गनालोया गांव की एक जर्जर कच्ची झोपड़ी, जिसकी छत को महज एक नीली प्लास्टिक शीट से ढका गया है, वहीं से आशीष तानी पूर्ति के आसमानी सपनों ने आकार लिया।

खेतों में पसीना बहाकर दिन के बमुश्किल 20-30 रुपये कमाने वाले मजदूर सुकुदानी पूर्ति और ललिता पूर्ति के इकलौते बेटे (तीन बहनों के भाई) आशीष बचपन में स्कूल की चारदीवारी से अक्सर भाग जाया करते थे।

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ननिहाल में पले-बढ़े आशीष को हॉकी की विरासत अपने मामा और नाना से मिली, जो पूर्व खिलाड़ी रह चुके थे। जब आशीष ने पहली बार पुरानी और घिसी हुई स्टिक थामी, तो उनके फटे जूतों और कीचड़ सने मैदान ने कभी उनके हौसलों की उड़ान को नहीं रोका।

भारत के सबसे घातक डिफेंडर और फ्लिकर
वर्ष 2022 में रीजनल डेवलपमेंट सेंटर और खूंटी के आवासीय सेंटर से होते हुए 2023 में एनटीएचए पहुंचने वाले आशीष को दिग्गज कोच हरिंदर सिंह का सानिध्य मिला। अकादमी की कृत्रिम टर्फ पर कड़ी मेहनत से आशीष आज भारत के सबसे घातक डिफेंडर और फ्लिकर बन चुके हैं।

जापान में आयोजित अंडर-18 एशिया कप में उनका प्रदर्शन किसी सुनामी से कम नहीं था। सेमीफाइनल में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ अकेले चार गोल दागकर उन्होंने करोड़ों देशवासियों का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

फाइनल में आया शानदार हैट्रिक
आशीष के खेल का असली तूफान फाइनल में आया, जब उन्होंने मेजबान जापान के कड़े डिफेंस को भेदते हुए शानदार हैट्रिक लगाई और भारत को 4-1 से एकतरफा जीत दिलाकर चैंपियन बना दिया। इससे पहले चीनी ताइपेई के खिलाफ भी उन्होंने तीन गोल दागे थे।

टूर्नामेंट में सर्वाधिक 13 गोल कर टॉप स्कोरर और प्लेयर ऑफ द मैच बने आशीष मानते हैं कि फाइनल जीतने से कहीं ज्यादा रूहानी खुशी उन्हें पाकिस्तान को हराने में मिली। हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) में रांची रॉयल्स के लिए खेलते हुए रजत पदक जीतने वाले आशीष की इस ऐतिहासिक सफलता पर हॉकी इंडिया ने उन्हें तीन लाख रुपये का नकद इनाम दिया है। अभावों की राख से उठकर चमकने वाला यह सितारा आज भारतीय खेलों का नया हीरो है।

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फुटबॉल के मैदान से हॉकी के शिखर तक
खेतों में दिहाड़ी मजदूरी कर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने वाले कल्याण सोरेन और जसमनी सोरेन का बेटा प्रेमचंद आज भारतीय हाकी के आसमान का चमकता सितारा है

लॉकडाउन के दौरान जब वह अपने गांव लौटे, तो वहां की जीवनरेखा माना जाने वाला एकमात्र पुल टूट चुका था। गांव की सरहदों में कैद होने की वह मजबूरी प्रेमचंद के लिए अप्रत्याशित वरदान बन गई।

गांव के कीचड़ और उबड़-खाबड़ मैदानों में समय बिताने के दौरान उनका रुझान हॉकी की ओर हुआ और फिर जो सफर शुरू हुआ, वह आज इतिहास के पन्नों में दर्ज है।

भारतीय टीम की अजेय दीवार और धुरी बने
तार कंपनी स्थित नवल टाटा हॉकी अकादमी (एनटीएचए) के अनुशासित और आधुनिक माहौल में एक कैडेट के रूप में प्रेमचंद ने अपनी खेल प्रतिभा को उस अकल्पनीय स्तर तक तराशा, जहां उनकी हॉकी स्टिक की गूंज से विरोधियों के पसीने छूट जाते हैं। 16वीं हॉकी इंडिया सब-जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में अपने अद्भुत खेल से प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब जीतकर उन्होंने अपने मजबूत इरादे जता दिए थे।

जापान में संपन्न अंडर-18 पुरुष एशिया कप में मिडफील्डर के रूप में वह भारतीय टीम की अजेय दीवार और धुरी बने रहे। टूर्नामेंट के एक अहम मुकाबले में उन्होंने शानदार गोल दागा। विदेश में जापानी खान-पान उन्हें बिल्कुल रास नहीं आया, लेकिन वतन के लिए कुछ कर गुजरने की भूख ने कभी उनकी ऊर्जा कम नहीं होने दी।

लीग मैच में जापान से मिली हार ने उन्हें भीतर तक आहत किया था, मगर सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 5-3 से धूल चटाने के बाद उनकी सारी निराशा जश्न में बदल गई। आज पूरा देश इस युवा मिडफील्डर को भारतीय टीम का स्वर्णिम भविष्य मान रहा है।

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