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योगी सरकार की पहल: महिला कल्याण विभाग की पहल रंग लाई, लाखों बेटियों का भविष्य हुआ मजबूत

By Admin|19 Apr 2026, 1:02 PM
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लखनऊ
 उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेटियों के उत्थान और सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से योगी सरकार बालिकाओं को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है। महिला कल्याण विभाग की ओर से संचालित यह योजना बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन रही है। इस योजना के तहत अब तक प्रदेश की 27 लाख से अधिक बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं, जो इसकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।

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बेटियों के लिए आर्थिक सुरक्षा और शिक्षा का मजबूत आधार
साल 2019 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब तक प्रदेश की 27,37,676 से अधिक बालिकाओं को लाभ मिल चुका है। योजना के अंतर्गत अब तक 674.13 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है। यह सहायता राशि कुल 6 चरणों में दी जाती है, जो बालिका के जन्म से लेकर ग्रेजुएशन में प्रवेश तक उसे आर्थिक संबल प्रदान करती है।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को मिल रहा बल
यह योजना न सिर्फ आर्थिक सहायता देती है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के लक्ष्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। लिंगानुपात में सुधार, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक और बालिकाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में यह योजना प्रभावी साबित हो रही है। यह योजना शत-प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित है।

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धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में
योजना का संचालन ऑनलाइन पोर्टल (mksy.up.gov.in) के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है। साथ ही पीएफएमएस के जरिए धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना खत्म हो जाती है। शासन स्तर से साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजना से वंचित न रहे।

योजना का लाभ पाने के लिए मुख्य शर्तें
इस योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी पात्रता शर्तें तय की हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। योजना के तहत लाभ पाने के लिए सबसे पहले लाभार्थी परिवार का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है। साथ ही परिवार की वार्षिक आय अधिकतम 3 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। इससे अधिक आय वाले परिवार इस योजना के पात्र नहीं माने जाएंगे। एक परिवार की अधिकतम दो ही बच्चियों को ही इस योजना का लाभ मिल सकता है।

इसके साथ ही परिवार में कुल बच्चों की संख्या भी अधिकतम दो ही होनी चाहिए। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में सरकार ने राहत भी दी है। अगर किसी महिला को दूसरे प्रसव में जुड़वा बच्चियां होती हैं, तो तीसरी संतान के रूप में जन्मी बालिका को भी योजना का लाभ मिलेगा। वहीं अगर पहले प्रसव से एक बालिका और दूसरे प्रसव में दो जुड़वा बालिकाएं होती हैं, तो ऐसी स्थिति में तीनों बच्चियों को योजना का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई परिवार अनाथ बालिका को गोद लेता है, तो जैविक और विधिक रूप से गोद ली गई संतानों को मिलाकर अधिकतम दो बालिकाओं को ही योजना का लाभ मिल सकेगा।

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छह चरणों में मिल रही सहायता
योजना के अंतर्गत बालिकाओं को छह अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों को मजबूती मिलती है। पहले चरण में बालिका के जन्म पर 5000 रुपये की धनराशि दी जाती है। जबकि दूसरे चरण में एक वर्ष तक के पूर्ण टीकाकरण के बाद 2000 रुपये प्रदान किए जाते हैं। तीसरे चरण में कक्षा प्रथम में प्रवेश लेने पर 3000 रुपये दिए जाते हैं।

इसी तरह चौथे चरण में कक्षा छह में प्रवेश पर 3000 रुपये और पांचवें चरण में कक्षा नौ में प्रवेश लेने पर 5000 रुपये की सहायता दी जाती है। अंतिम और छठे चरण में कक्षा 10वीं या 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेने पर 7000 रुपये की धनराशि दी जाती है। इस प्रकार कुल 25 हजार रुपये की सहायता से सरकार बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है।

बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल
महिला कल्याण निदेशालय की डायरेक्टर डॉ. वंदना वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना प्रदेश की बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि सरकार के साफ निर्देश है कि कोई भी पात्र बालिका इस योजना के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र लाभार्थियों का समयबद्ध पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए और उन्हें शीघ्र लाभ उपलब्ध कराया जाए। डॉ. वर्मा ने कहा कि यह योजना न सिर्फ आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

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