छत्तीसगढ़

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मिला औपचारिक निमंत्रण, भेंट हुई मां दंतेश्वरी की तस्वीर

By Admin|20 Sep 2025, 5:06 PM
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जगदलपुर

जगप्रसिद्ध बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में शामिल होने के लिए आयोजन समिति ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को औपचारिक निमंत्रण दिया है.

बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप के नेतृत्व में पहुंचे मांझी-चालकी एवं मेबरिन ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इस दौरान उन्हें बस्तर दशहरा एवं मुरिया दरबार में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया, साथ ही उन्हें मां दंतेश्वरी की तस्वीर भेंट की.

क्यों खास है बस्तर दशहरा
भारत में दशहरा आमतौर पर भगवान राम की रावण पर विजय का प्रतीक माना जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में मनाया जाने वाला दशहरा इससे बिल्कुल अलग और रहस्यमयी है. यह न तो रावण दहन से जुड़ा है, न ही रामलीला से— बल्कि यह मां दंतेश्वरी की आराधना, तांत्रिक विधियों, जनजातीय परंपराओं और गहरे आध्यात्मिक रहस्यों से जुड़ा विश्व का सबसे लंबा दशहरा पर्व है, जो पूरे 75 दिनों तक चलता है.

13वीं शताब्दी में हुई थी शुरुआत
कहा जाता है कि 13वीं शताब्दी में बस्तर के तत्कालीन राजा पुरुषोत्तम देव ने माता दंतेश्वरी की आज्ञा पर इस पर्व की शुरुआत की थी. मान्यता है कि राजा ने जगदलपुर में माता का दर्शन करने के बाद राज्य की रक्षा के लिए दशहरा उत्सव शुरू करने का संकल्प लिया. (Bastar Dussehra) लेकिन यह दशहरा कोई साधारण उत्सव नहीं था- इसमें तांत्रिक अनुष्ठान, देवी का रथ, रात्रि पूजन और अज्ञात शक्तियों के आह्वान जैसे रहस्यमयी पहलू जुड़े हुए थे.

75 दिनों के दौरान 13 अनुष्ठान
बस्तर दशहरा की शुरुआत हरेली अमावस्या से होती है और इसका समापन 13 प्रमुख अनुष्ठानों के साथ होता है. इन अनुष्ठानों में पट जात्रा (लकड़ी लाने की परंपरा), देवी का निवेदन, काछिन गादी, रथारोहण, मावली परघाव, और अंत में बहराम देव की विदाई शामिल होती है. हर चरण का अपना रहस्य है– विशेषकर मावली यात्रा, जिसमें देवी की प्रतिमा को रात के अंधेरे में जंगल से लाया जाता है, जहां केवल विशेष पुरोहित ही जा सकते हैं.

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जनजातीय पुजारियों की भूमिका
बस्तर दशहरा में ब्राह्मणों की जगह जनजातीय पुजारियों (गुड़िया, सिरहा, मांझी) की भूमिका प्रमुख होती है. रात्रि के समय गुप्त तांत्रिक अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनमें कोई बाहरी व्यक्ति शामिल नहीं हो सकता. माना जाता है कि इन रात्रि पूजाओं के माध्यम से अदृश्य शक्तियों को प्रसन्न किया जाता है, जो बस्तर की रक्षा करती हैं.

“मावली” की अनकही कड़ी
बस्तर दशहरा में देवी दंतेश्वरी को राज्य की कुलदेवी माना जाता है, लेकिन पर्व में एक और देवी “मावली” की विशेष भूमिका होती है, जिन्हें जंगल से लाकर दंतेश्वरी देवी के साथ बैठाया जाता है. यह परंपरा बस्तर में प्रकृति, जंगल और देवी के बीच के गहरे रहस्यात्मक संबंध को दर्शाती है.

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