बिहार / झारखण्डराज्‍य

खनन कानून से झारखंड को बड़ा राजस्व झटका, मंईयां सम्मान समेत कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है असर

By Admin|01 Sep 2026, 3:43 PM
f X W

रांची
झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना में एक साथ पूरे राज्य की महिलाओं के खाते में पैसा डालने की योजना फिलहाल अधर में है। सितंबर-अक्टूबर से हर महीने एक विशेष दिन को ‘मंईयां सम्मान दिवस’ घोषित कर एक साथ राशि भेजने का विचार था, लेकिन अब यह संभव नहीं दिख रहा।

Advertisement
Advertisement

फिलहाल पैसा पहले की तरह अलग-अलग जिलों में महिलाओं के खातों में जाएगा। योजना में कोई अन्य परिवर्तन नहीं होगा और झारखंड सरकार का प्रयास है कि पूर्व की भांति महिलाओं को नियमित रूप से सम्मान राशि मिलती रहे।

वरिष्ठ पत्रकार राकेश परिहार बताते हैं कि राज्य सरकार का सबसे बड़ा पैसा इस योजना में जा रहा है। यह महिलाओं की जिंदगी में सकारातमक बदलाव रहा है। झामुमो सरकार की यह सबसे महत्वाकांक्षी योजना है। मगर इस बजट पर गंभीर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में संसद से पारित खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (MMDR Amendment Bill, 2026) के कारण राज्य सरकार को खनन से होने वाले अतिरिक्त राजस्व में भारी कमी का अनुमान है। इससे महिलाओं को प्रतिमाह मिलने वाली सम्मान राशि प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

योजना के तहत राज्य की करीब 51 लाख पात्र महिलाओं (18 से 50 वर्ष आयु वर्ग) को हर महीने 2,500 रुपये सीधे बैंक खाते में दिए जा रहे हैं। यह राशि मुख्य रूप से झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस एक्ट, 2024 के तहत खनिज-युक्त भूमि पर लगाए गए सेस से जुटाई जा रही थी।

READ ALSO  नवाब मोड़ पर बन रहा नया मधुपुर स्टेशन, 281 करोड़ की परियोजना से बढ़ेगी सीधी रेल कनेक्टिविटी

राज्य सरकार के अनुसार, इस सेस से सालाना करीब 11,000 से 14,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान था, जिसका बड़ा हिस्सा मंईयां सम्मान योजना सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में इस्तेमाल होता था।

नए संशोधन के बाद राज्य सरकारें खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर अपनी ओर से अतिरिक्त कर, उपकर या सेस नहीं लगा सकेंगी। राज्य सरकार का दावा है कि इससे हर साल 13,000-15,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इसे राज्य के राजस्व पर बड़ा झटका बताया है और कहा है कि इससे मंईयां सम्मान योजना समेत अन्य कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 14,065 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इससे पहले भी अनुपूरक बजट में बड़ी राशि आवंटित की जा चुकी है।

सत्ता पक्ष का आंदोलन और आर्थिक नाकेबंदी की तैयारी
सत्ताधारी झामुमो-कांग्रेस गठबंधन केंद्र के खिलाफ जोरदार आंदोलन चला रहा है। झामुमो ने चेतावनी दी है कि अगर बिल वापस नहीं लिया गया तो चरणबद्ध तरीके से जन जागरण, बंद और अंत में खनिजों की आर्थिक नाकेबंदी की जा सकती है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर चिंता जताई है कि खनन राजस्व राज्य के अपने गैर-कर राजस्व का करीब 85 प्रतिशत है और इसमें कटौती से विकास तथा कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित होंगी।

केंद्र सरकार का पक्ष है कि खनन से होने वाले कुल राजस्व का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा अब भी राज्यों को ही मिलता रहेगा और नए कानून से राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में स्थिरता और पारदर्शिता लाना बताया जा रहा है।

READ ALSO  डॉलर-दिरहम से लेकर दिनार तक, सांवरिया सेठ को भक्तों ने चढ़ाई 60 देशों की करेंसी

राज्य सरकार कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से अपना अधिकार बचाने पर जोर दे रही है। योजना की निरंतरता और महिलाओं को समय पर राशि मिलने पर नजर बनी हुई है।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins