छत्तीसगढ़

स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने घरों से की बदलाव की शुरुआत

By Admin|01 Sep 2026, 11:56 PM
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रायपुर

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रे-वाटर यानी घरेलू गंदे पानी के सुरक्षित प्रबंधन के लिए दुर्ग जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं एवं स्वच्छताग्राहियों द्वारा श्रमदान से 3360 सोख्ता गड्ढों (सोक पिट) का निर्माण किया गया है। अभियान का उद्देश्य घरों से निकलने वाले निस्तारित एवं गंदे पानी को गलियों, रास्तों और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में बहने से रोकना है।

 इससे गांवों में गंदगी और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के साथ-साथ पानी के प्राकृतिक निस्तारण एवं भू-जल पुनर्भरण को भी बढ़ावा मिलेगा। दुर्ग जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी  बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रे-वाटर के सुरक्षित प्रबंधन को लेकर जनभागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। महिलाओं द्वारा स्वयं आगे बढ़कर अपने घरों से इस अभियान की शुरुआत करना ग्रामीण समुदाय के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

‘पहले खुद से शुरुआत’ बनी अभियान की पहचान

 इस पहल की खास बात है कि स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘नेतृत्व परिवर्तन और स्वयं से शुरुआत’ की प्रेरणादायक थीम के साथ अपने घरों से ही अभियान की शुरुआत की। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुरू किए गए इस अभियान को अपशिष्ट जल प्रबंधन सप्ताह के रूप में आगे बढ़ाया गया। महिलाओं ने संकल्प लिया कि यदि उनके घरों से निकलने वाला गंदा पानी खुले में बह रहा है, तो वे सबसे पहले अपने घर के आसपास सोख्ता गड्ढे का निर्माण करेंगी। इसके बाद अन्य ग्रामीण परिवारों को भी इसके लिए प्रेरित किया गया।

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श्रमदान से तैयार हो रहे सोख्ता गड्ढे

 अभियान पूरी तरह जनभागीदारी और श्रमदान पर आधारित है। स्वच्छताग्राहियों एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने आपसी सहयोग से घरों के आसपास लगभग 2 से 3 फीट गहरे गड्ढे तैयार किए। इनमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ईंट, पत्थर और कंकड़ आदि सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे घरेलू पानी जमीन में सुरक्षित रूप से सोख सके और भू-जल पुनर्भरण में मदद मिले।

सेप्टिक टैंक के ओवरफ्लो पानी का भी सुरक्षित प्रबंधन

अभियान का दायरा केवल सामान्य घरेलू ग्रे-वाटर तक सीमित नहीं है। ऐसे ग्रामीण परिवार, जिनके घरों में सेप्टिक टैंक युक्त शौचालय हैं और टैंक के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी खुले में बह रहा था, उन्हें भी अभियान से जोड़ा गया है। ऐसे स्थानों पर विशेष सोक पिट एवं सोख्ता गड्ढों के माध्यम से पानी के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था की जा रही है।

 सोख्ता गड्ढों का निर्माण तकनीकी रूप से सही तरीके से हो, इसके लिए जनपद पंचायत स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, करारोपण अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी, विकासखण्ड समन्वयक एवं तकनीकी सहायकों द्वारा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया गया। गांवों के संकुल बनाकर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो अभियान की सतत मॉनिटरिंग और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित कर रहे हैं।
 
 जिले में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पूर्व में भी ग्राम पंचायतों में वर्मी एवं नाडेप संरचनाओं की सफाई, कचरे का पृथक्करण तथा सार्वजनिक जलस्रोतों के आसपास स्वच्छता अभियान चलाए गए हैं। ग्रे-वाटर प्रबंधन की यह पहल इन प्रयासों को और मजबूती प्रदान कर रही है। जिला प्रशासन और स्व-सहायता समूहों की इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता एवं जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। वहीं, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं जनभागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की प्रभावी मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।

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