बिहार / झारखण्डराज्‍य

ई-केवाईसी लगभग पूरा, लेकिन फार्मर रजिस्ट्री में किसानों को परेशानी का सामना

By Admin|29 Apr 2026, 6:58 PM
f X W

 मधुबनी

Advertisement
Advertisement

कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन फार्मर रजिस्ट्री के नए नियम किसानों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।

जिला में मिशन मोड में अभियान चलाकर सभी पंचायत में विशेष कैंप लगा फार्मर रजिस्ट्री एवं ई-केवाईसी की प्रक्रिया फरवरी तक की गई।

बावजूद इसके जिले में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के 3 लाख 21 हजार 514 पंजीकृत किसानों में से अब तक केवल 1 लाख 74 हजार 742 किसानों का फार्मर रजिस्ट्री हुआ है।

इस तरह जिले में अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि योजना के लिए पंजीकृत किसानों में से महज 55 प्रतिशत किसानों का फार्मर रजिस्ट्री हुआ है, जिन्हें यूनिक आईडी जारी किया जा चुका है।

परेशानियों से जूझ रहे किसान
विभागीय कर्मियों के अनुसार, पीएम किसान योजना के लिए पूर्व में कई किसानों ने अपने पूर्वजों या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज जमीन के आधार पर आवेदन कर दिया था, लेकिन अब फार्मर रजिस्ट्री केवल उन्हीं किसानों की हुआ है, जिनके नाम पर जमीन की जमाबंदी दर्ज है।

ऐसे में पूर्वजों के नाम से जमीन रखने वाले बड़ी संख्या में किसान रजिस्ट्री से वंचित रह गए हैं। फार्मर रजिस्ट्री के दौरान जमीन की जमाबंदी में दर्ज नाम और आधार कार्ड में नाम में अंतर होने पर भी रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका है। इससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।

संयुक्त जमाबंदी रही समस्या
जिले में संयुक्त जमाबंदी के कारण बड़ी संख्या में किसान निबंधन नहीं करा सके हैं। किसानों का कहना है कि निबंधन के लिए अंचल कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

READ ALSO  टोरंटो में मोहन भागवत का संबोधन, हिंदू समुदाय से संवाद-सहयोग और विश्व बंधुत्व पर जोर

दरअसल, अब एलपीसी, किसान सम्मान निधि, केसीसी और विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसान निबंधन अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में निबंधन नहीं होने से किसान सरकारी योजनाओं से वंचित होने का खतरा महसूस कर रहे हैं।

किसानों का आरोप है कि संयुक्त जमाबंदी को अलग कराने की प्रक्रिया काफी जटिल है। जिले में अधिकांश किसानों की जमीन की जमाबंदी आज भी उनके मृत पिता या दादा के नाम से दर्ज है, जबकि कई मामलों में नाम की त्रुटियां भी हैं। इन कारणों से किसान निबंधन नहीं हो पा रहा है।

94 प्रतिशत किसानों का ई-केवाईसी पूरा
जिले के 3 लाख से अधिक पंजीकृत किसानों का ई-केवाईसी पूरा कर लिया गया है। जबकि फॉर्मर रजिस्ट्री महज 1,74742 किसानों का ही किया जा सका है। विभागीय कर्मियों का कहना है कि एफआर प्रक्रिया में सबसे अधिक परेशानी रही है। संबंधित किसान के नाम से जमीन का अद्यतन और स्पष्ट कागजात होना अनिवार्य है। कई किसानों के पास संयुक्त या पारिवारिक नाम से दर्ज भूमि है, जबकि कई मामलों में जमीन के दस्तावेज अपडेट नहीं हैं।

प्रखंड: कुल पंजीकृत किसान – फार्मर रजिस्ट्री की संख्या
    अंधराठाढ़ी: 12,137 – 7,129
    बाबूबरही: 27,156 – 9,253
    बासोपट्टी: 11,479 – 6,737
    बेनीपट्टी: 26,101 – 12,325
    बिस्फी: 17,917 – 9,347
    घोघरडीहा: 25,598 – 7,551
    हरलाखी: 21,855 – 7,040
    जयनगर: 10,813 – 5,137
    झंझारपुर: 9,928 – 8,075
    कलुआही: 6,739 – 5,873
    खजौली: 8,877 – 6,285
    लदनियां: 19,426 – 8,528
    लखनौर: 11,496 – 6,835
    खुटौना: 22,286 – 8,321
    लौकही: 12,515 – 11,421
    मधेपुर: 20,997 – 8,097
    मधवापुर: 6,949 – 5,491
    पंडौल: 15,811 – 13,835
    फुलपरास: 15,674 – 8,777
    रहिका: 8,120 – 9,073
    राजनगर : 11,953 – 9,612

READ ALSO  MP में पावर सेक्टर को बड़ी सौगात, सीहोर में नई ट्रांसफॉर्मर यूनिट से पहला ट्रांसफॉर्मर होगा रोल-आउट

क्या कहते हैं पदाधिकारी
    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभुक 174742 किसानों का फॉर्मर रजिस्ट्री करते हुए यूनिक आईडी कोड तैयार किया जा चुका है। पंजीकृत सभी किसानों को ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री करवाना होगा। जिनका ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री नहीं होगा उन्हें सरकार के द्वारा दी जाने वाली विभिन्न कृषि योजनाओं से वंचित रहना पड़ सकता है। -ललन कुमार चौधरी, जिला कृषि पदाधिकारी मधुबनी

 

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button
Play GK Quiz and Win Coins