छत्तीसगढ़

सरोज देवी ने किया देहदान, मेडिकल छात्रों के लिए बनी शिक्षा और प्रेरणा का स्रोत

By Admin|13 Nov 2025, 1:42 PM
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  • डॉक्टर बनने वाले छात्र सीखेंगे सरोज देवी की देह से
  •  सरोज देवी के देहदान को सबने प्रेरणादायक कहा
  • देहदान को सभी ने अत्यंत प्रेरक बताया

कांकेर
 शहर के बरदेभाठा निवासी सरोज देवी शर्मा (82) और पत्रकार स्व. बंशीलाल शर्मा की धर्मपत्नी का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को निधन हो गया। के अनुरूप परिजनों ने उनकी इच्छा सरोज देवी शर्मा उनका पार्थिव शरीर कांकेर मेडिकल कॉलेज में अध्ययन के लिए दान किया।   

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साल 2020 में खुले कांकेर मेडिकल कॉलेज के इतिहास में यह तीसरा देहदान है। सरोज देवी शर्मा समेत अब तक तीन लोगों के पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को सौंपे जा चुके हैं। मेडिकल से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा मृत देह मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए साइलेंट टीचर की तरह होती हैं। वे इसी से शारीरिक अंगों पर प्रैक्टिकल कर दूसरों को जीवन देना सीखते हैं।

स्वर्गीय सरोज देवी शर्मा का निधन 11 नवंबर को 1.45 बजे हुआ। परिजनों ने उनकी इच्छा अनुरूप आपसी सहमति से सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते अपनी माता के पार्थिव शरीर को मेडिकल कॉलेज को दान करने निर्णय लिया था। परिजनों ने कुछ दिन पहले ही फॉर्म भरा था। उनके पुत्र और वरिष्ठ पत्रकार राजेश शर्मा ने बताया हमारी माता के स्वभाव में ही था कि वे हमेशा लोगों की मदद करने आगे रहती थीं। उनकी इच्छा भी यही थी कि वे मृत्यु के बाद भी किसी के काम आ सकें। उनकी इसी भावना को देखते हुए पूरे परिवार ने आपस में सलाह मशवरा कर उनका पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज कांकेर के एनाटॉमी विभाग को मेडिकल अनुसंधान के लिए दान करने का फैसला लिया। विदित हो कि सरोज देवी शर्मा धार्मिक प्रवृत्ति की थीं और सामाजिक कामों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती थीं। उनके पति स्व. बंशीलाल शर्मा बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार थे। देशबंधु और दैनिक भास्कर जैसे संस्थाओं में अपनी सेवाएं दे चुके थे।

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परिवार से और भी भर चुके हैं देहदान का फॉर्म
इस परिवार से सरोजदेवी शर्मा के देवर बिलासपुर निवासी वरिष्ठ पत्रकार नथमल शर्मा पहले ही देहदान करने फॉर्म भर चुके हैं। उनका मानना है इंसान को जीवित रहते लोगों के काम आना ही चाहिए और मरणोपरांत भी काम आते रहना चाहिए।

देहदान एक महादान है

विधायक आशाराम नेताम ने कहा एक अच्छी सोच होने के साथ ही यह प्रेरणादायक भी है। मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों को अध्ययन के लिए मृत देह की जरूरत होती है। मृत शरीर का मेडिकल की पढ़ाई में एक बड़ा योगदान होना होता है। देहदान एक महादान है। देहदान एक सामाजिक उत्तरदायित्व मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. यास्मिन खान ने कहा कि देहदान सामाजिक उत्तरदायित्व भी है, जो चिकित्सा शिक्षा और शोध को आगे बढ़ाने में मदद करता है।

समाज में अच्छे डॉक्टर देने के लिए देहदान जरूरी
मेडिकल कॉलेज में छात्रों की पढ़ाई व समाज के अच्छे डॉक्टर देने के लिए देहदान जरूरी है। छात्रों को अच्छे से पढ़ाई करने मृत देह के विकल्प में दूसरी कोई चीज नहीं है। उससे ही छात्र सीखते हैं। मृत देह छात्रों के लिए साइलेंट टीचर होती हैं।

एनाटॉमी विभाग के प्रो. स्वयं आए देह लेने

आज सवेरे राजेश शर्मा के निवास से अंतिम यात्रा प्रारम्भ हुई । बरदेभाटा चौक पर परिजनों एवं नगर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में सरोज देवी का पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को सौप दिया गया जिसे लेने एनाटॉमी विभाग के प्रो डा. विश्वास स्वयं अपनी टीम के साथ पहुंचे थे ।
तत्पश्चात् वहीं श्रद्धांजलि सभा हुई । जिसमें शिक्षा विद सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने शर्मा परिवार द्वारा इस देहदान के निर्णय को अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक बताया । इससे मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को अध्ययन करने में मदद मिलेगी । तत्पश्चात् दो मिनट का मौन रख कर मृतात्मा को श्रद्धांजलि दी गई ।

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