मध्य प्रदेश

कार्टूनिस्ट केस: SC से अग्रिम जमानत मंजूर, कोर्ट ने चेताया- सहयोग नहीं किया तो रद्द होगी जमानत

By Admin|02 Sep 2025, 5:42 PM
f X W

इंदौर

प्रधानमंत्री और संघ कार्यकर्ताओं के आपत्तिजनक कार्टून बनाने वाले कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत दे दी। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ ने यह देखते हुए कि कार्टूनिस्ट ने सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों से माफी मांगी ली है, अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली। हालांकि  सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को यह छूट दी कि अगर कार्टूनिस्ट जांच में सहयोग नहीं करते हैं, तो वे उनकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकते हैं।

याचिकाकर्ता के वकील ने दिया ये तर्क
सुनवाई के दौरान, मालवीय की वकील वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल ने माफी मांग ली है और याचिकाकर्ता को अभी तक जांच के दौरान पूछताछ के लिए तलब नहीं किया गया है। इस पर केंद्र सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने जवाब दिया कि सभी सबूत इकट्ठा होने के बाद ही तलब किया जाएगा।

मई में इंदौर में हुई थी शिकायत
कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय के खिलाफ वकील और आरएसएस कार्यकर्ता विनय जोशी ने मई में इंदौर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और मालवीय पर अपने कार्टूनों के जरिए आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने और हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत करने और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप लगाया था। 15 जुलाई को, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने मालवीय के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और मंगलवार को अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया। इससे पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हेमंत मालवीय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। 

READ ALSO  तेंदूपत्ता संग्राहकों के बच्चों की शिक्षा को संबल दे रही एकलव्य शिक्षा छात्रवृत्ति योजना

मालवीय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 3 जुलाई को दिए गए आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कार्य), 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य) और 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67-ए (इलेक्ट्रॉनिक रूप में किसी भी यौन रूप से स्पष्ट सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करना) के तहत मामला दर्ज किया है। 

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button