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बिहार CM सम्राट चौधरी का संदेश: पहले बुलडोजर, अब टोपी, योगी की तरह बन रही पहचान

By Admin|18 Apr 2026, 1:42 PM
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पटना
बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक बार फिर अपने तेवरों को लेकर चर्चा में हैं. वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राह पर चल पड़े हैं. पहले उन्होंने प्रदेश में योगी मॉडल की तरह ही बुलडोजर एक्शन शुरू किया था. उसके बाद अब टोपी पहनने से इनकार कर दिया. दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान सम्राट चौधरी ने मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार कर दिया. टोपी पहनाने वाले शख्स को तुरंत रोक दिया. वाक्ये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 

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मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद एनडीए के कई नेता सम्राट चौधरी से मिलने पहुंच रहे हैं. हाल ही में जनता दरबार के दौरान कई लोग उनसे मिलने पहुंचे. सम्राट से मुलाकात के दौरान लोगों ने अलग-अलग तरीके से उनका स्वागत किया. किसी ने फूल-माला पहनाई तो किसी ने शॉल ओढ़ाकर सम्मान दिया. इसी बीच मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधि ने उन्हें टोपी पहनाने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री ने टोपी पहनने से इनकार करते हुए उसे हाथ में ले लिया और गमछा ओढ़कर सम्मान स्वीकार किया. बाद में उन्होंने टोपी पीछे खड़े गार्ड को दे दी. वीडियो में दिखता है कि व्यक्ति बार-बार टोपी पहनाने की कोशिश करता है, लेकिन सम्राट चौधरी ने उसे नहीं पहना. हालांकि, उन्होंने उसी व्यक्ति का गमछा स्वीकार किया। 

टोपी न पहनने में छिपा क्या सियासी संदेश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के टोपी न पहनने पर कई कयास लगाए जा रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सम्राट की पॉलिटिक्स अक्सर हिंदुत्व और अपने लव-कुश (कुशवाहा) वोट बैंक को मजबूत करने पर केंद्रित रहती है. बीजेपी के कई बड़े नेता सार्वजनिक रूप से मुस्लिम टोपी पहनने से बचते दिखते हैं. इसे तुष्टिकरण की राजनीति के विरोध के रूप में देखा जाता है. मालूम हो कि, बीते दिनों नीतीश कुमार ने भी मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार किया था। 

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सीएम बनते ही एक्शन में सम्राट
बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी एक्शन मोड में हैं. वह नीतीश कुमार की तरह ही जनता दरबार के जरिए लोगों से सीधे मुलाकात कर रहे हैं. उनकी समस्याएं भी सुन रहे हैं. शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचे और कई अहम फाइलों की समीक्षा की थी. उन्होंने प्रशासनिक कामकाज को गति देने से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और मुख्य सचिव समेत सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली औपचारिक बैठक की थी। 

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