छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

राजनांदगांव : 4 वर्षीय ग्रेजुएशन पूरा, अब 1 वर्षीय पीजी पर अटका भविष्य…

By kadwaghut|21 Jul 2026, 12:16 PM
f X W

राजनांदगांव , नई शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम पूरा कर चुके विद्यार्थियों के लिए एक वर्षीय पीजी में प्रवेश को लेकर स्पष्ट नीति नहीं होने से असमंजस की स्थिति बन गई है। सातवें एवं आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों का कहना है प्रवेश के समय एक वर्षीय पीजी में प्रवेश का अवसर मिलने की जानकारी दी थी, लेकिन अब तक शासन स्तर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं होने से उनका भविष्य अधर में है। विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन से समाधान की मांग की है।

छत्तीसगढ़ के स्वायत्तशासी कॉलेजों में नई शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम संचालित है। विद्यार्थियों ने बताया वर्तमान व्यवस्था में 7.5 या उससे अधिक सीजीपीए प्राप्त विद्यार्थियों को ‘ऑनर्स विद रिसर्च’ के तहत सातवें एवं आठवें सेमेस्टर में अध्ययन का अवसर मिला। इससे कम सीजीपीए वाले विद्यार्थी इस व्यवस्था से बाहर रहे। अब सातवें एवं आठवें सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक वर्षीय पीजी में प्रवेश प्रक्रिया व पात्रता पर कोई बताया गया है कि स्पष्ट आदेश जारी नहीं होने से छात्रों में भ्रम और चिंता बढ़ रही है।

गाइड लाइन जारी नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित होगी विद्यार्थियों ने कहा शासन और विश्वविद्यालय की व्यवस्था पर भरोसा कर नई शिक्षा नीति अनुरूप अध्ययन किया है। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, जिससे किसी विद्यार्थी का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो और सभी पात्र विद्यार्थियों को समान अवसर मिले। विद्यार्थियों ने मांग करते हुए कहा कि सातवें एवं आठवें सेमेस्टर पूर्ण करने वाले सभी पात्र विद्यार्थियों को एक वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश का अवसर सुनिश्चित किया जाए, ताकि उनका शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।

READ ALSO  CG : रिहायशी इलाके में पटाखों का अवैध भंडारण, 8.56 लाख का माल जब्त ...

सभी पात्र विद्यार्थियों को समान अवसर नहीं दे रहे पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और सचिव ऋषि शास्त्री ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन भेजकर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है। सभी पात्र विद्यार्थियों को समान अवसर देने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य उच्च शिक्षा को अधिक लचीला, समावेशी और अवसर आधारित बनाना है। ऐसे में नीति के अनुरूप अध्ययन पूरा करने वाले विद्यार्थियों को आगे पढ़ाई के अवसर से वंचित करना एनईपी की मूल भावना के विपरीत होगा। इसमें शासन व यूनिवर्सिटी को ध्यान देने की जरूरत है।

अगली खबर लोड हो रही है...

Related Articles

Back to top button