मध्य प्रदेशराज्‍य

मोहन यादव सरकार में जल्द विस्तार या सर्जरी? नए समीकरणों के बीच मंत्रिमंडल बदलाव की चर्चा तेज

By Admin|31 May 2026, 9:06 AM
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भोपाल
 मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) की तस्वीर बदलने जा रही है। जून के अंत तक कैबिनेट में बड़ा फेरबदल (Major Cabinet Reshuffle) होना लगभग तय है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कम से कम 5-6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है तो 7-8 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। 2023 में मोहन यादव के नेतृत्व में बनी सरकार के कैबिनेट में पहली बार बदलाव होने जा रहा है। कैबिनेट में इस समय मोहन यादव समेत कुल 31 सदस्य हैं।

हाल के दिनों में मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) कई बार दिल्ली पहुंचे हैं और शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकातों के दौरान कैबिनेट में फेरबदल की रूपरेखा पर सहमति बन चुकी है। 19 मई को मोहन यादव की मुलाकात जगदलपुर में गृहमंत्री अमित शाह के साथ हुई थी। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय भी बुलाए गए थे। मुख्यमंत्री की दिल्ली में भी शाह से मुलाकात हुई। वह पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से भी मिले। सूत्रों के मुताबिक, इन बैठकों में कैबिनेट के नए स्वरूप पर विस्तार से बातचीत हुई है। बताया जा रहा है कि 20 से 30 जून के बीच कभी भी पुराने मंत्रियों से इस्तीफा लिया जा सकता है और इसके तुरंत बाद शपथग्रहण होगा।

कैलाश विजयवर्गीय का क्या होगा?
कैबिनेट फेरबदल में जिन मंत्रियों पर सबसे ज्यादा नजरे हैं उनमें कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हैं। कैबिनेट में सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल कैलाश विजयवर्गीय को लेकर अटकलें हैं कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है। वहीं प्रह्लाद सिंह को केंद्रीय संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। बताया जाता है कि वरिष्ठता की वजह से ये मंत्री कैबिनेट में सहज नहीं हैं। भाजपा के पूर्व महासचिव रह चुके कैलाश विजयवर्गीय को जब विधनसभा चुनाव में उतारा गया था तो उन्हें संभावित मुख्यमंत्रियों की सूची में भी प्रमुखता से गिना जा रहा था, लेकिन बाजी मोहन यादव की लगी जो कहीं रेस में नहीं दिख रहे थे।

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और किन मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी
मोहन यादव कैबिनेट से जिन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, उनमें सबसे प्रबल नाम विजय शाह का है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले मंत्री को लेकर पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार तीखी टिप्पणियां की हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, पंचायती राज्य मंत्री राधा सिंह, शहरी प्रबंधन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी, वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार शामिल हो सकते हैं।

नए चेहरों को मिल सकता है मौका
कैबिनेट विस्तार में कई नए विधायकों और नेताओं को अवसर मिलने की चर्चा है. पार्टी क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए नामों का चयन कर सकती है. सागर और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से कुछ नेताओं के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं. इसके अलावा महिला, युवा और आदिवासी वर्ग को बेहतर प्रतिनिधित्व देने पर भी भाजपा विचार कर सकती है. माना जा रहा है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाने के लिए नए चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। 

प्रदर्शन के आधार पर होगा फैसला
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की है. इसी मूल्यांकन के आधार पर मंत्रिमंडल में बदलाव का फैसला लिया जा सकता है. पार्टी का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले सरकार की कार्यक्षमता और जनसंपर्क को और मजबूत बनाना है. ऐसे में जून का अंतिम सप्ताह मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए काफी अहम साबित हो सकता है, क्योंकि कैबिनेट फेरबदल से कई नए राजनीतिक संदेश और समीकरण सामने आने की संभावना है। 

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किन्हें मंत्री बनाए जाने की चर्चा
सागर जिले से आने वाले विधायकों शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को पद मिलना लगभग तय माना जा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाने वाले प्रमुराम चौधरी को भी मंत्री बनाया जा सकता है। पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा कुछ नए और युवा चेहरों को भी मौका दिया जा सकता है। महिला और आदिवासी समुदाय को भी साधने की कोशिश होगी। सूत्रों का यह भी कहना है कि पुराने कुछ मंत्रियों को हटाकर जहां नए चेहरों को जगह दी जाएगी, वहीं विभागों में भी बड़े पैमाने पर फेरबदल होगा। कुछ मंत्रियों से मौजूदा विभाग लेकर नए मंत्रालय दिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों के कामकाज की गहन समीक्षा की है और इसी आधार पर बड़े और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

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