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भारत में नम्बर वन ट्रेंड कर रही चमन बहार

यशवंत और नीरज ने किया जिले का नाम रौशन
राजनादगाँवः ‘चमन बहार’ छत्तीसगढ़ के मुंगेली ज़िला के लोरमी नगर पालिका की यह कहानी । यह फिल्म हमें दिखाती है – कच्चे पक्के सड़क , मिट्टी के बने घर , सरकारी स्कूल ड्रेस में लड़के लडकिया , पान ठेला , सुनाती है – छत्तीसगढ़ी लहजे में डायलाग , संगीत और महसूस करवाती है – दिनचर्या को जिसे देखकर लगता है कि यार ये तो हम ही हैं । ठेले पर गप्पे मारते और दोस्तो के साथ आवारागर्दी करते लड़के , एकतरफा प्यार में तड़पता आशिक़ माफ कीजिए तड़पता नही तड़पते आशिक़ क्योंकि आशिकों की संख्या एक या दो नही बल्कि अनगिनत है और भी बहुत सी रोमांचक बातें हैं जो आपको सिर्फ फिल्म देखने पर ही पता चलेगी । फिल्म या सिनेमा कहते ही जिस एक शहर का नाम दिमाग में आता है वो है मुम्बई मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि यह फिल्म छत्तीसगढ़ में बनी है जिसे रायपुर और आरंग के आसपास फिल्माया गया है । जिसमें कुछ छत्तीसगढ़ कलाकार भी शामिल हैं । इन्ही कलाकारों की सूची में शामिल हैं राजनांदगांव शहर के दो युवा कलाकार- यशवंत आनंद गुप्ता और नीरज उके । पिछले सात सालों से दोनों ही रंगमंच की दुनिया से जुड़े हुए हैं । नाटकों के साथ कई शार्ट फिल्म , फीचर फिल्म में काम कर चुके इन कलाकारों के लिए यह पहला बड़ा प्रोजेक्ट है । आर्टिस्ट बनने का जैसे ही सोचो लोग कहते हैं मुंबई जाओ स्ट्रगल करो लेकिन इन कलाकारों ने ये साबित किया है कि कला को दिखाने के लिए किसी प्रॉपर शहर या जगह की जरूरत नही है । जितनी सम्भावनाएं किसी बड़े शहर में है उतनी ही छोटे शहर में भी । शहर के गली चौराहों पर नुक्कड़ नाटक करने वाले कलाकार , पैसे या कोई सुविधा न मिलने के बावजूद भी अपना पूरा समय नाटको को देने वाले , अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री को दरकिनार कर कला के प्रति उनका प्यार , उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है कि आज वो भारत में नम्बर वन ट्रेंड कर रही फिल्म चमन बहार का अहम हिस्सा हैं । किरदार भले ही छोटे हैं मगर जिस प्रभावशाली ढंग से उन्होंने उसे निभाया है वाकई काबिल ए तारीफ़ है । लेखक – निर्देशक अपूर्वधर बड़गैया की यह पहली फिल्म है जिसे जरूर देखनी चाहिए ।जीतू भैया और साथी कलाकारों की शानदार एक्टिंग ,फिल्म की कहानी , टिपिकल छत्तीसगढ़ी स्टाइल में सजी गीत और संगीत , डैडी केमिस्ट्री के साथ कई मज़ेदार दृश्य इस फ़िल्म को और भी मजेदार बनाता है।
यशवंत और नीरज की इस सफलता पर उनकी नाट्य संस्था सृजन रंग यात्रा के संस्थापक शरद श्रीवास्तव जी ने बधाई दी है और शहर के सभी रंगकर्मी साथियों ने दोनों कलाकारो के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है ।

यशवंत आनंद गुप्ता : __इस फ़िल्म की शूटिंग 2018 में हुई थी। मुझे खुशी है कि लोग मेरे किरदार को पसंद कर रहे है । मै निर्देशक अपूर्व धर बडगैया जी का धन्यवाद करता हूं की उन्होंने अपनी फिल्म को छत्तीसगढ़ में शूट किया जिससे यहां के कलाकारो को अच्छा मौका मिला और अन्य कलाकारो का मनोबल भी बढ़ रहा है। इस क्षेत्र से जुड़े हुए सभी कलाकारों को भविष्य में उनसे काफी उम्मीदें है ।
इस साल हमारी और कुछ फिल्में भी आने वाली है जिसमें से फीचर फिल्म 4 सम शायद इस साल रिलीज हो सकती है ।

नीरज उके : _ फ़िल्म में मैंने एक सुपरवाइजर का किरदार निभाया है। इस फ़िल्म के माध्यम से एक अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म मेकिंग टीम के साथ काम करने और सीखने का मौका मिला है। मुझे महसूस हुआ कि जब आप इतने मंझे हुए कलाकारों के साथ काम करते है तब वहां आपके इतने सालो का रंगमंच का तजुर्बा ही काम आता है । साल के अंत तक सोचत सोचत प्यार होगे , 4 सम और ग्रे हिंदी फिल्म रिलीज़ हो सकती है ।

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