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सेवा की कहानी : पोषण पुनर्वास केंद्र से लौट रही बच्चों के चेहरे की मुस्कान

By Admin|25 Sep 2026, 7:19 PM
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विशेष लेख

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सेवा की कहानी : पोषण पुनर्वास केंद्र से लौट रही बच्चों के चेहरे की मुस्कान

कुपोषण की पीड़ा से स्वस्थ और खुशहाल बचपन की ओर बढ़ रहे बच्चे

बढ़ता वजन सिर्फ तराजू पर बढ़ती संख्या नहीं, लौटती ताकत, मुस्कान और बचपन की कहानी है

रायपुर, 
 बचपन यानी खेलना, दौड़ना, हंसना, सीखना और सपने देखना। लेकिन जब कोई बच्चा कुपोषण की गिरफ्त में आता है तो कमजोरी उसके शरीर के साथ उसके सामान्य बचपन को भी प्रभावित करने लगती है। ऐसे बच्चों को समय पर उपचार और पोषण देकर स्वस्थ जीवन की ओर वापस लाने में पोषण पुनर्वास केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सेवा संकल्प अभियान के बीच सरगुजा जिले के शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय, अम्बिकापुर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) से सामने आ रही बच्चों की कहानियां इसी बदलाव की तस्वीर पेश करती हैं। यहां कुपोषित बच्चों को चिकित्सकीय देखभाल और पोषण पुनर्वास के साथ माता-पिता को भी बच्चे के खान-पान और देखभाल से जुड़ी आवश्यक जानकारी दी जा रही है।

यहां किसी बच्चे का बढ़ता हुआ वजन महज तराजू पर बदलता आंकड़ा नहीं है। उसके पीछे बच्चे की बेहतर होती पोषण स्थिति, माता-पिता की उम्मीद और स्वास्थ्यकर्मियों की सतत देखभाल जुड़ी है। यह उस बचपन को वापस पाने की कोशिश है, जिसे कुपोषण ने कमजोर कर दिया था।

कुपोषण केवल कम वजन की समस्या नहीं

कुपोषण को केवल बच्चे के दुबले या कमजोर दिखाई देने तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। गंभीर कुपोषण बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता और वृद्धि-विकास को प्रभावित कर सकता है। लंबे समय तक पर्याप्त पोषण नहीं मिलने का असर बच्चे के शारीरिक विकास के साथ सीखने और सामान्य गतिविधियों में उसकी भागीदारी पर भी पड़ सकता है।

यही कारण है कि कुपोषण की समय पर पहचान और उपचार महत्वपूर्ण है। बच्चे को उचित पोषण और चिकित्सकीय देखभाल देकर स्वस्थ वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाना उसके वर्तमान स्वास्थ्य के साथ भविष्य में निवेश भी है।

जहां उपचार के साथ लौटता है बचपन

पोषण पुनर्वास केंद्र गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार और पोषण पुनर्वास की महत्वपूर्ण व्यवस्था है। यहां बच्चे की स्वास्थ्य एवं पोषण स्थिति की निगरानी, आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल और पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराने के साथ माता-पिता को बच्चे की देखभाल तथा खान-पान से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है।

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इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल बच्चे का वजन बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे स्वस्थ वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाना और परिवार को ऐसी जानकारी देना भी है जिससे घर लौटने के बाद बच्चे के पोषण का बेहतर ध्यान रखा जा सके।

20 बिस्तरों का केंद्र, सैकड़ों बच्चों के लिए उम्मीद

शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय, अम्बिकापुर में संचालित 20 बिस्तरों वाला पोषण पुनर्वास केंद्र कुपोषित बच्चों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद का केंद्र बन रहा है।

वर्ष 2021-22 में यहां 189 बच्चों के उपचार के साथ दर्ज दर 73 प्रतिशत थी। अप्रैल से सितम्बर 2026 की अवधि में 248 बच्चों के उपचार के साथ यह दर बढ़कर 88 प्रतिशत दर्ज की गई है।

इन आंकड़ों के पीछे उन परिवारों की अनेक कहानियां हैं जो अपने कमजोर बच्चे को लेकर चिंता के साथ केंद्र पहुंचे और उपचार एवं पोषण पुनर्वास के बाद बेहतर स्वास्थ्य की उम्मीद लेकर घर लौटे।

शिवाशी, रश्मि, प्रतीक और युवराज के बढ़ते वजन में दिखी उम्मीद

केंद्र में उपचार प्राप्त करने वाले बच्चों के रिकॉर्ड इस बदलाव को और स्पष्ट करते हैं। शिवाशी का वजन 7.6 किलोग्राम से बढ़कर 8.840 किलोग्राम, रश्मि का 9.3 किलोग्राम से 10.720 किलोग्राम, प्रतीक का 8.5 किलोग्राम से 9.370 किलोग्राम तथा युवराज का वजन 12 किलोग्राम से बढ़कर 13.980 किलोग्राम दर्ज किया गया।

ये आंकड़े केवल वजन में आए बदलाव को नहीं बताते, बल्कि उपचार और पोषण पुनर्वास के बाद बेहतर वृद्धि की दिशा में बच्चों के बढ़ते कदमों की तस्वीर भी प्रस्तुत करते हैं।

हर बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है और केवल वजन बढ़ने के आधार पर संपूर्ण स्वास्थ्य का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके बावजूद नियमित निगरानी में वजन और वृद्धि में सुधार बच्चे की पोषण स्थिति का आकलन करने के महत्वपूर्ण संकेतकों में शामिल हैं।

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बढ़ता वजन यानी लौटती उम्मीद

कुपोषण से कमजोर बच्चा कई बार अपनी उम्र के दूसरे बच्चों की तरह सामान्य गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी नहीं कर पाता। बीमारी और कमजोरी परिवार की चिंता भी बढ़ाती है।

ऐसे में उपचार और उचित पोषण के बाद जब बच्चे की स्थिति में सुधार दिखाई देता है, तो यह पूरे परिवार के लिए राहत लेकर आता है। माता-पिता के लिए बच्चे का स्वस्थ होना किसी आंकड़े से कहीं अधिक मायने रखता है।

इसीलिए पोषण पुनर्वास केंद्र में किसी बच्चे का बढ़ता वजन केवल तराजू पर बढ़ती संख्या नहीं है। वह बच्चे की बेहतर होती पोषण स्थिति के साथ परिवार में लौटती उम्मीद की कहानी भी है।

अस्पताल से घर तक जारी रहती है सुपोषण की यात्रा

एनआरसी में उपचार पूरा होना महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन बच्चे को कुपोषण से दूर रखने की जिम्मेदारी इसके बाद भी जारी रहती है। घर लौटने के बाद उम्र के अनुसार पर्याप्त और विविध आहार, स्वच्छता, बीमारी के दौरान उचित देखभाल तथा बच्चे की वृद्धि की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण होती है।

इसलिए एनआरसी में माता-पिता को बच्चे के पोषण और देखभाल से संबंधित व्यवहार की जानकारी देना उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उद्देश्य यह है कि परिवार स्वयं भी बच्चे की पोषण स्थिति को बेहतर बनाए रखने में सक्रिय भागीदारी करे।

स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग सहित संबंधित अमले का समन्वय इस व्यवस्था को और मजबूत बनाता है। एक ओर स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार एवं पोषण पुनर्वास और दूसरी ओर समुदाय स्तर पर आंगनबाड़ी एवं स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से निगरानी और मार्गदर्शन—दोनों मिलकर कुपोषण के विरुद्ध प्रभावी व्यवस्था तैयार करते हैं।

स्वस्थ बच्चा यानी स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव

बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्ष उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। पर्याप्त पोषण मिलने पर बच्चा स्वस्थ वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता है, अधिक सक्रिय रह सकता है और सीखने तथा सामाजिक गतिविधियों में बेहतर भागीदारी कर सकता है।

इसलिए किसी बच्चे को कुपोषण से बाहर निकालने का प्रयास केवल वर्तमान बीमारी या कमजोरी का उपचार नहीं है। यह उसके बेहतर बचपन और भविष्य को मजबूत करने की दिशा में किया गया निवेश भी है। स्वस्थ और सुपोषित बच्चे ही स्वस्थ समाज और मजबूत मानव संसाधन की नींव बनते हैं।

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कुपोषण से लड़ाई अस्पताल से घर की थाली तक

कुपोषण से मुकाबला केवल अस्पताल के बिस्तर पर नहीं किया जा सकता। इसकी सफलता बच्चे की घर की थाली, माता-पिता की जागरूकता, आंगनबाड़ी की निगरानी, स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह और समय पर उपचार की संयुक्त व्यवस्था पर निर्भर करती है।

पोषण पुनर्वास केंद्र की वास्तविक सफलता भी इसी में है कि उपचार के बाद बच्चा बेहतर पोषण स्थिति के साथ घर लौटे और परिवार उन व्यवहारों को अपनाए जो उसे स्वस्थ बनाए रखने में मदद करें।

अम्बिकापुर के एनआरसी में बच्चों के उपचार और पोषण पुनर्वास के साथ परिवारों को जागरूक करने का प्रयास इसी सोच को आगे बढ़ा रहा है।

हर बच्चे को मिले स्वस्थ बचपन का अवसर

कुपोषण किसी बच्चे की पहचान नहीं है। यह ऐसी स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी स्थिति है, जिसकी समय पर पहचान, उपचार और निरंतर देखभाल से बच्चे को स्वस्थ वृद्धि की राह पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।

सेवा संकल्प अभियान के बीच अम्बिकापुर के पोषण पुनर्वास केंद्र की ये कहानियां बताती हैं कि सेवा का सबसे मानवीय रूप तब दिखाई देता है, जब कमजोर बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार आता है और परिवार के चेहरे पर चिंता की जगह उम्मीद लौटती है।

20 बिस्तरों वाला यह केंद्र इसलिए केवल एक स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। यहां उपचार पाने वाला हर बच्चा कुपोषण से सुपोषण, कमजोरी से बेहतर स्वास्थ्य और मुश्किलों से खुशहाल बचपन की ओर बढ़ती एक नई कहानी है।

और जब किसी बच्चे का वजन बढ़ता है, उसकी सक्रियता लौटती है और परिवार उसे फिर स्वस्थ होते देखता है, तब सेवा का वास्तविक अर्थ सामने आता है— बढ़ता वजन सिर्फ तराजू पर बढ़ती संख्या नहीं, बल्कि लौटती ताकत, मुस्कान और बचपन की कहानी है।

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