
राजनांदगांव : हरियाली बहिनी अभियान से मिलेट बनाकर स्व रोजगार से जोड़ा…
राजनांदगांव , ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण और पोषण सुधार को लेकर हरियाली बहिनी अभियान एक प्रेरणा दायक पहल के रूप में उभर रहा है। अभियान से महिलाओं को मिलेट मित्र बना कर न केवल उन्हें स्व रोजगार से जोड़ा जा रहा है, बल्कि मिलेट के उपयोग को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य भी किया जा रहा है। अभियान के तहत आयोजित प्रशिक्षण शिविरों और बैठकों में महिलाओं को मिलेट के पोषण गुण, स्वास्थ्य लाभ और इसके विभिन्न उपयोगों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
विशेष रूप से कुपोषण से जूझ रहे क्षेत्रों में मिलेट को एक प्रभावी समाधान के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। महिलाओं को यह भी सिखाया जा रहा है कि वे कम लागत में घर पर ही मिलेट से कई प्रकार के व्यंजन तैयार कर सकती हैं। नाश्ते में पोहा, इडली, डोसा, उपमा और चीला, जबकि मुख्य भोजन में ज्वार, बाजरा, रागी, और कोदो की रोटी का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। वहीं, कोदो से खीर, लड्डू और हलवा जैसे स्वादिष्ट मिठाइयां भी बनाई जा रही हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं।
छोटे स्तर पर मिलेट लड्डू बनाया, अब बड़ा व्यवसाय अभियान के प्रमुख शिव कुमार देवांगन ने बताया पहल की शुरुआत नवंबर 2025 में छोटे स्तर पर मिलेट लड्डू के निर्माण से हुई थी। अब संगठित व्यवसाय का रूप ले चुकी है। वर्तमान में लड्डू के साथ मिक्चर , चिप्स जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। हालही में 11 अप्रैल 2026 से मिलेट आधारित मैगी, पास्ता, नूडल्स, अलसी, देशी गुड़, कुल्थी और अन्य सुपर फूड पहल में शामिल किए हैं। अब तक 15 हजार से ज्यादा लोगों ने उत्पादों का लाभ उठाया। लगभग 5 लाख रुपए का व्यवसाय किया जा चुका है।
पारंपरिक जाता प्रणाली के चावल से मिलेट बना हरियाली बहिनी अभियान प्रमुख मिलेट मित्र शिव कुमार देवांगन ने बताया आदिवासी क्षेत्रों यह सामने आया कि किसानों के पास पारंपरिक जाता प्रणाली है, लेकिन उससे चावल निकालना कठिन कार्य है। यह तकनीक 55 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं ही जानती हैं। कुछ महिलाओं ने पारंपरिक पद्धति को पुनः अपनाया है। कोदो-कुटकी के चावल से मिलेट बनेगा आय बढ़ेगी। बीपी-शुगर से पीड़ितों के लिए मिलेट वरदान है। इससे महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया।



