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Rajnandgaon:ग्राम पनेका में बेटियों ने निभाया अंतिम कर्तव्य मां को दी मुखाग्नि

By kadwaghut|26 Dec 2025, 10:29 PM
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➡️बौद्ध समाज की समानता परंपरा का जीवंत उदाहरण बनी चार पुत्रियां

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राजनांदगांव। बौद्ध समाज की समतामूलक सोच और मानवीय मूल्यों को साकार करता एक प्रेरणादायक दृश्य ग्राम पनेका में देखने को मिला जहाँ सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए बेटियों ने अपनी मां को अंतिम विदाई दी। दिवंगत माता देवला नोन्हारे (उम्र लगभग 73 वर्ष) के अंत्येष्टि संस्कार में उनकी चारों पुत्रियों ने मिलकर मुखाग्नि देकर समाज को नई दिशा देने वाला संदेश दिया।

दिवंगत माता देवला नोन्हारे के अंतिम संस्कार के दौरान उनकी चार पुत्रियां आशा, सुमन, अनिता एवं कुमारी सरिता नोन्हारे ने संयुक्त रूप से मुखाग्नि दी। यह दृश्य न केवल भावुक था बल्कि मातृभक्ति, साहस और कर्तव्यबोध का जीवंत प्रतीक भी बना। यह आयोजन बौद्ध धम्म की उस मूल भावना को दर्शाता है जिसमें नर-नारी समानता, करुणा, सम्मान और न्याय को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। बौद्ध समाज में बेटा-बेटी के भेदभाव को नकारते हुए यह कार्य सामाजिक चेतना को मजबूत करने वाला साबित हुआ। अंत्येष्टि के दौरान उपस्थित समाज के लोगों ने इस पहल को गर्व, सम्मान और श्रद्धा के साथ देखा। समाजजनों का कहना था कि बेटियों द्वारा किया गया यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत प्रेरणा बनेगा और समाज में समानता की सोच को और बल देगा। इस अवसर पर यह स्पष्ट हुआ कि बदलते समय में बेटियां हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी और सामर्थ्य का प्रमाण दे रही हैं। यह घटना समाज में व्याप्त रूढ़ मान्यताओं को तोड़ते हुए समान अधिकार और कर्तव्य की भावना को मजबूत करती है। इस प्रेरणादायक घटना की जानकारी बौद्ध कल्याण समिति के अध्यक्ष बुद्ध प्रकाश गायकवाड द्वारा दी गई। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्य बौद्ध समाज की प्रगतिशील सोच और मानवतावादी मूल्यों को दर्शाते हैं।

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