छत्तीसगढ़राजनांदगांव जिला

Rajnandgaon : संघ के प्रथम वर्षगांठ बैठक का आयोजन किया गया…

राजनांदगांव, भूतपूर्व अर्धसैनिक कल्याण संघ, छत्तीसगढ़ द्वारा शक्ति कलियुग के मूल मंत्र को शिरोधार्य करते हुए गत दिनों रायपुर में संघ के प्रथम वर्षगांठ बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता संघ अध्यक्ष टेकराम साहू ने की। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष कुमार साहू, कोषाध्यक्ष पवन तुल्यावी, सचिव कमलेश चौबे, उप कोषाध्यक्ष दिलीप खरे, सहसचिव रामगोपाल वट्टी, जिला प्रभारी गणेश्वर पटेल, संस्थापक कल्याण वर्मा सहित कार्यकारिणी सदस्य विनोद कुमार सोरी, संतोष वर्मा, घनश्याम वर्मा, गजेंद्र वर्मा, नसीमचंद्र भारती एवं अन्य वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सदस्यों ने नृत्य कर यह संदेश दिया कि फौजी कभी रिटायर्ड नहीं होता, भले ही वर्दी तन पर न हो, लेकिन फर्ज हमेशा साथ रहता है।

कार्यक्रम की शुरुआत यादव भवन परिसर में पौधरोपण से की गई। कार्यक्रम में मंच संचालन संतोष वर्मा ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन कर वंदे मातरम् एवं छत्तीसगढ़ महतारी गीत का सामूहिक गायन हुआ। इस अवसर पर संघ के वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान किया गया। संघ के नए सदस्य योगेश्वर प्रसाद को सरपंच, ग्राम पंचायत खुर्सेनी चुने जाने की खुशी में संघ की ओर से मोमेंटो देकर उनका अभिनंदन किया गया। इसके पश्चात संघ अध्यक्ष टेकराम साहू एवं उपाध्यक्ष कुमार साहू ने अपने उद्बोधन में संघ के उद्देश्यों, एकता और भूतपूर्व अर्धसैनिकों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। वहीं कोषाध्यक्ष पवन उप कोषाध्यक्ष ने संघ की वित्तीय स्थिति का विवरण प्रस्तुत करते हुए संगठन की पारदर्शिता को स्पष्ट किया। संगठन से जुड़ें और अपने अनुभव साझा करते हुए कल्याणकारी योजनाओं को सफल बनाने में सहभागी बनें।

नीतियों पर चर्चा की गई बैठक के दौरान संगठनात्मक विषयों, पूर्व अर्धसैनिकों के हित में चलाई जा रही योजनाओं पर विचार किया गया। संघ की कल्याणकारी नीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस क्रम में गजेंद्र वर्मा एवं गणेश्वर पटेल द्वारा प्रस्तुत गीतों ने वातावरण को भावविभोर कर दिया। वहीं अमरसिंह वासनिक, गजेंद्र वर्मा, योगेश वर्मा एवं योगेश्वर प्रसाद के ओजस्वी भाषणों ने उपस्थित जनसमूह में जोश और उत्साह भर दिया। कार्यक्रम के दौरान सभी सदस्यों ने नृत्य कर यह संदेश दिया कि फौजी कभी रिटायर्ड नहीं होता, भले ही वर्दी तन पर न हो, लेकिन फर्ज हमेशा साथ रहता है।

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