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CG : सिद्ध पद जन्म-मरण से मुक्त आत्मा का शुद्ध स्वरूप : महेंद्र सागर…

By lokesh sharma|01 Oct 2025, 10:32 AM
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विवेकानंद नगर में हुई नवपद ओली के दूसरे दिन सिद्ध पद की आराधना

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रायपुर । विवेकानंद नगर में नवपद ओली के दूसरे दिन सिद्ध पद की आराधना की गई। ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी चातुर्मासिक प्रवचनमाला में उपाध्याय भगवंत आध्यात्म योगी महेंद्र सागरजी महाराज साहब ने कहा कि सिद्धपद आत्मा की शुद्ध अवस्था है। एकदम शुद्ध अवस्था अर्थात जिसमें किसी प्रकार की मलीनता नहीं है। संसार में हमारी आत्मा के साथ राग, द्वेष, मोह बंधे हुए हैं। इनके कारण ही कर्म बंधे हुए हैं। कर्म के कारण शरीर बंधा हुआ है। कुटुंब, परिवार, संपत्ति आदि बंधी हुई है। बंधनों के चक्कर में इस प्रकार से हम बंधे हुए हैं।

उपाध्याय भगवंत ने कहा कि सबसे बड़ा बंधन शरीर रूपी जेल का है। कर्म का कारण हमारा राग, द्वेष, मोह है। राग, द्वेष, मोह का कारण हमारा अज्ञान व मिथ्यात्व है। इस प्रकार से पूरा चक्र है। कर्म बंधन के कारण संसार में परिभ्रमण चलते रहता है। हमें अनेक प्रकार के शरीर मिलते हैं। अनेक प्रकार के स्थान मिलते हैं। आत्मा वही रहती है लेकिन आत्मा अनेक प्रकार के शरीर व स्थान में जाती है।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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