राजनीति

जरूरी कदम उठाने की बजाय तुष्टीकरण की राजनीति कर रहीं ममता बनर्जी

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नागार्जुन

पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी चाहती हैं कि हर चीज उनके नियंत्रण में रहे। वह न तो राज्‍यपाल की नसीहत मानती हैं और न ही केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहती हैं। स्थिति यह है कि राज्‍य के कई इलाके रेड जोन घोषित किए गए हैं, फिर भी उन इलाकों में मजहबी कार्यक्रम पर न तो कोई पाबंदी है और न ही लॉकडाउन का पालन हो रहा है

पश्चिम बंगाल की स्थिति बहुत खराब है। लेकिन राज्‍य सरकार कोरोना संक्रमितों और इससे होनी वाली मौतों का आंकड़ा छिपा रही है। राज्‍य सरकार की माने तो 22 अप्रैल तक सूबे में 423 लोग कोरोना संक्रमित थे, जबकि 15 लोगों की मौत हुई। लेकिन सचाई इससे कहीं ज्‍यादा भयावह है, जिसे ममता बनर्जी छिपा रही हैं। राज्‍य के कई इलाकों में संक्रमण तेजी से फैला है और बड़ी संख्‍या में डॉक्‍टर, नर्स और स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी संक्रमित हैं। खासकर मेडिकल कॉलेज, हावड़ा जनरल अस्पताल, आरजी कर अस्पताल, नील रतन सरकार आदि अस्‍पतालों के डॉक्टरों एवं नर्सों के साथ अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी संक्रमित हैं। जन वितरण प्रणाली में घोटाले के आरोप लग रहे हैं। जरूरतमंद लोगों तक राहत सामग्री नहीं पहुंच रही है। लेकिन इसके बावजूद ममता बनर्जी तुष्टिकरण की राजनीति में व्‍यस्‍त हैं और ‘मीडिया प्रबंधन’ के जरिए अपनी पीठ थपथपा रही हैं। यही नहीं, ममता बनर्जी राज्‍यपाल जगदीप धनखड़ और केंद्र सरकार से भी टकराव के मूड में हैं। केंद्र के निर्देशों के बावजूद न तो मुस्लिम बहुल इलाकों में लॉकडाउन का पालन हो रहा है और न जमातियों, कट्टरपंथियों पर ही नकेल कस रही है। ममता सरकार का यह रवैया तब है, जब देश में राज्‍य की स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राज्‍यपाल से ममता की तनातनी

मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी और राज्‍यपाल जगदीप धनखड़ में बीते एक हफ्ते से ठनी हुई है। राज्‍यपाल 13 अप्रैल से लगातार ट्वीट कर राज्‍य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं और नसीहत भी दे रहे हैं। उनका पहला ट्वीट भाजपा सांसदों को अपने इलाके में काम करने से रोकने को लेकर था। इसके बाद उन्‍होंने कोरोना संक्रमण और मौतों के आंकड़े छिपाने, जमातियों और मजहबी कार्यक्रमों को रोकने में नाकामी और केंद्र सरकार द्वारा 10 अप्रैल को भेजे गए पत्र के प्रति उदासीनता के मामले उठाए। लेकिन ममता बनर्जी का गुस्‍सा उनके 18 अप्रैल के ट्वीट के बाद भड़का। इसमें राज्‍यपाल ने राशन वितरण में घोटाले का आरोप लगाते हुए ट्वीट किया था कि राशन वितरण में किसी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसके बाद राज्‍य सरकार ने आरोपों को बेबुनियाद करार देते हुए जवाबी पत्र में लिखा कि अब तक 90 प्रतिशत यानी करीब 9 करोड़ लोगों को राशन दिया जा चुका है। इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं बरती गई है। साथ ही, लिखा कि केंद्र से मिलने वाला राशन अभी तक नहीं पहुंचा है। लेकिन राज्‍यपाल का कहना है कि उन्‍होंने खाद्य मंत्री रामविलास पासवास से जब इस बारे में पूछा तो उन्‍होंने बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से आपूर्ति में कोई परेशानी नहीं है। रोड़े तो राज्‍य सरकार खुद ही अटका रही है। वह कहते हैं कि सरकार कोरोना से मौत की पुष्टि एक विशेषज्ञ टीम से कराती है। इससे लोगों में संदेह पैदा हो रहा है। राज्‍य सरकार के आंकड़ों पर न तो जनता, न ही डॉक्‍टरों और न ही मीडिया को विश्‍वास हो रहा है। उनका आरोप है कि राज्‍य सरकार संक्रमण रोकने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा रही है और केवल प्रचार कर रही है। मीडिया को बड़े-बड़े विज्ञापन देकर दावे किए जा रहे हैं कि सरकार ने कितना काम किया, जबकि हकीकत में जितना काम होना चाहिए था उतना भी नहीं हुआ। उन्‍होंने कहा कि ड्रामेबाजी से कोरोना के विरुद्ध लड़ाई जीती नहीं जा सकती। यह लड़ाई तीसरे विश्‍वयुद्ध की तरह है, लेकिन राज्‍य सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं है।
राज्‍यपाल ने प्रदेश में कुछ इलाकों में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की सिफारिश की थी, लेकिन राज्‍य सरकार ने उसे भी नहीं माना। राज्‍यपाल कहते हैं, ‘‘राज्‍य में बड़े पैमाने पर जांच करने की जरूरत है। इसी से पता लगेगा कि राज्‍य में स्थिति कितनी गंभीर है। राज्‍य में संक्रमण की जांच का आंकड़ा राष्‍ट्रीय औसत का करीब एक तिहाई है, जो चिंता का कारण है। जमातियों ने जिस तरह से संक्रमण फैलाया है, उसे देखते हुए हर प्रांत सक्रियता से उनकी पहचान कर उन्‍हें क्‍वारंटीन कर रहा है और कार्रवाई कर रहा है। लेकिन बंगाल में मुख्‍यमंत्री से जब पूछा कि निजामुद्दीन मरकज से यहां कितने जमाती आए हैं, सरकार ने क्‍या कदम उठाया हैं ? इस पर उन्‍होंने तल्‍ख लहजे में कहा कि सांप्रदायिक प्रश्‍न न पूछें।’’
बचाव में कूदे कांग्रेस सांसद
कोरोना से निपटने के ममता सरकार के तौर तरीकों और राहत सामग्री वितरण में अनियमितता का आरोप वामपंथी पार्टियां और अन्‍य दूसरे संगठन भी लगा रहे हैं। भाजपा और वामपंथी दलों को विशेषज्ञ टीम द्वारा मौत की पुष्टि करने पर भी आपत्ति है। उनका कहना है कि मौत की रिपोर्ट इलाज करने वाले डॉक्टरों द्वारा ही दी जानी चाहिए। राशन वितरण में घपले, घटिया व कम मात्रा में अनाज वितरण तथा कोरोना संक्रमितों के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाते हुए 18 अप्रैल को वामपंथी नेता बिमान बोस, मोहम्मद सलीम, सूर्यकांत मिश्रा ने विरोध प्रदर्शन भी किया था। उनका भी आरोप है कि राज्‍य सरकार कोविड-19 से मौतों की संख्‍या दबा रही है। केंद्रीय खाद्य मंत्री भी राज्‍य सरकार को लिखे पत्र में राशन वितरण में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक को फटकार लगाने के साथ मनोज अग्रवाल को हटाकर परवेज अहमद सिद्दिकी को खाद्य सचिव नियुक्‍त किया था।
बहरहाल संकट की घड़ी में कांग्रेस ममता के साथ खड़ी है। राज्‍य सरकार की नाकामी पर राज्‍यपाल द्वारा किए जाने वाले ट्वीट पर कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने ममता बनर्जी का पक्ष लिया। 21 अप्रैल को उन्‍होंने ट्वीट किया कि राज्‍यपाल का काम जनता द्वारा चुनी गई सरकार के काम में बाधा पहुंचाना नहीं होता। राज्यपाल को सत्तारूढ़ सरकार का मित्र और मार्गदर्शक होना चाहिए, शत्रु नहीं। गौरतलब है कि सिंघवी तृणमूल कांग्रेस के समर्थन से पश्चिम बंगाल से राज्‍यसभा सांसद चुने गए हैं।
केंद्र सरकार से टकराव
केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई टीम को लेकर भी ममता बनर्जी टकराव के मूड में दिखीं। ममता बनर्जी ने राज्‍य के सात संवेदनशील जिलों का जायजा लेने के लिए टीम भेजने पर केंद्र सरकार की मंशा पर ही सवाल उठाए। उन्‍होंने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी औऱ गृहमंत्री अमित शाह से पूछा कि राज्‍य में केंद्रीय टीम को किस आधार पर भेजा जा रहा है ? ठोस कारण जाने बिना उनकी सरकार केंद्रीय टीम को सहयोग नहीं दे पाएगी। साथ ही, लिखा कि ऐसी स्थिति में केंद्रीय टीम भेजना संघीय सरकार के मान्य नियमों का उल्लंघन है। लेकिन गृह मंत्रालय की चिट्ठी मिलने के बाद उनके सुर बदले और उन्‍होंने केंद्रीय टीम से सहयोग का वादा किया। इसके बाद राज्य के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा ने केंद्रीय टीम के प्रमुख और रक्षा मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अपूर्वचंद्र के साथ बैठक की। इसके बाद टीम के सदस्‍यों ने जादवपुर अंचल का दौरा किया।
इससे पहले टीम को दौरा करने, डॉक्‍टरों व स्वास्थ्य कर्मियों से मिलने तथा हालत का जायजा लेने से रोका गया। तब केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्‍य के मुख्य सचिव को पत्र लिख्रकर कहा था कि यह केंद्र सरकार के आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 का उल्लंघन है और सर्वोच्‍च न्‍यायालय के निर्देशों की अवहेलना करने जैसा है। दरअसल, केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के सर्वाधिक संक्रमण वाले इलाकों में अंतर मंत्रालयी केंद्रीय टीम (आईसीएमटी) भेजने की घोषणा की थी। ये इलाके हैं- कोलकाता, हावड़ा, पूर्वी मिदनापुर, हावड़ा, कलिम्‍पोंग, दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी। लेकिन जब केंद्रीय टीम राज्‍य के रेड जोन क्षेत्रों में हालात का जायजा लेने पहुंची तो राज्‍य सरकार से उन्‍हें कोई सहयोग नहीं मिला। इस पर टीम के प्रमुख ने नाराजगी भी जताई थी। केंद्रीय टीम के आने के बाद न केवल ममता बनर्जी, बल्कि पूरा प्रशासन सतर्क है और सख्‍ती बरती जा रही है। संवेदनशील इलाकों में नाकाबंदी के अलावा वाहनों की तलाशी भी ली जा रही है। वहीं, मालबाजार में केंद्रीय टीम के दौरे की संभावना के मद्देनजर आनन-फानन में बाजार व दुकानें बंद करा दी गईं तथा लोगों से इलाका खाली करने को कहा गया।
चिंता की वजह
गृह मंत्रालय ने राज्‍य सरकार को 10 अप्रैल को एक पत्र भेजा था। इसमें कोलकाता और हावड़ा के 40 इलाकों को हॉटस्‍पॉट घोषित किया गया था। इसमें कोलकाता के राजाबाजार, नरकेल डांगा, तोपसिया, गार्डेनरीच, मानिकतल्‍ला आदि शामिल हैं। इसके बाद राज्‍य सरकार की नींद टूटी और उसने बऊबाजार, न्यू मार्केट, तालतला और मूचीपाड़ा थाना क्षेत्र के इलाकों के साथ कोलकाता के 30 रास्‍तों और गलियों को पूरी तरह लॉकडाउन कर दिया है। इन इलाकों के लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने को कहा जा रहा है। साथ ही, संक्रमित इलाकों में ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है। खुद मुख्‍यमंत्री ने भवानीपुर अंचल का दौरा कर हालात का जायजा लिया। इसी तरह बालीगंज, बेनियापुकुर, पार्क सर्कस, राजारबाजार, काकुरगाछी, मानिकतल्‍ला, बेलियाघाटा, गिरीश पार्क, इंटाली, तिलजला, तपसिया, अलीपुर, चेतला, मुदियाली में भी सख्‍ती की गई है। ईएम बाईपास से कोलकाता की मुख्य सड़कों को जोड़ने वाले रास्‍ते भी बंद हैं। बेलगछिया, काकुलिया, नारकेलडांगा, राजाबाजार, तिलजला अति संवेदनशील क्षेत्र हैं। बेलगछिया की एक बस्‍ती में ऐसे लोग संक्रमित मिले हैं जो कहीं गए ही नहीं।

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