राजनांदगांव. जिले के मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी के वाहन से दुर्घटनाग्रस्त होकर एक व्यक्ति की मौत के बाद न्यायालय के आदेश पर भी मुआवजा राशि नहीं देने के मामले में, आज पीड़ित परिवार न्यायालय के मोहर्रि के साथ कुर्की की कार्रवाई के लिए सीएचएमओ ऑफिस पहुंचे। लेकिन ऑफिस से जवाबदारों के नदारद होने के चलते पीड़ित परिवार को खाली हाथ ही लौटना पड़ा।
8 मार्च वर्ष 2016 को 40 वर्षीय करण लाल नारंगें की मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी के एंबुलेंस वाहन से दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे, इस दुर्घटना के चलते करण लाल की मौत हो गई थी। पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाने न्यायालय तक पहुंचा और इस मामले की सुनवाई द्वितीय अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के न्यायालय में की गई। 29 जनवरी वर्ष 2018 को न्यायालय ने पीड़ित पक्ष के हक में फैसला सुनाते हुए मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी के खिलाफ एक आदेश जारी कर, पीड़ित परिवार को 7 लाख 28 हजार 125 रूपये का मुआवजा राशि देने आदेश जारी किया। इस बीच पीड़ित परिवार कई बार मुआवजा राशि के लिए सीएमएचओ कार्यालय के चक्कर काटता रहा, लेकिन 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक उन्हें मुआवजा राशि नहीं मिली। आज मृतक करण लाल की पत्नी बैसाखिन बाई और उनका पुत्र कुलेश्वर नारंगे अपने वकील और न्यायालय के मोहर्रम के साथ कुर्की की कार्रवाई के लिए मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय पहुंचे, लेकिन यहां कोई भी जिम्मेदार मौजूद नहीं था। वर्तमान सीएमएचओ भी दफ्तर से नदारद थे। ऐसे में पीड़ित पक्ष को खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ा। इस मामले में पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता कुंदन साहू का कहना है कि 7 लाख 28 हजार 1 सौ 25 रूपये मुआवजा राशि न्यायालय के आदेश के बाद भी सीएमएचओ के द्वारा पीड़ित परिवार को नहीं दिया गया और आज 6 वर्ष बाद इस राशि पर दावा तिथि से 6 प्रतिशत ब्याज लगने से मुआवजा राशि लगभग 9 लाख 90 हजार हो गई है। उन्होंने कहा कि सीएमएचओ कार्यालय के सामानों की कुर्री कर रुपयों की अदायगी की जाती लेकिन दफ्तर में कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति नहीं मिलने की वजह से आज कुर्की की कार्रवाई नहीं हो पाई है।
कुंदन साहू अधिवक्ता ने बताया कि मृतक करण लाल नारंगे का परिवार न्यायालय से आदेश जारी होने के 4 वर्ष बाद भी मुआवजा नहीं मिलने की वजह से मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी के दफ्तर के चक्कर काट रहा है। न्यायालय के आदेश की अवहेलना होने के चलते पीड़ित परिवार को वक्त पर मुआवजा नहीं मिल रहा है। इस मामले में मृतक के पुत्र का कहना है कि शासकीय वाहन के लापरवाही पूर्वक चलाने के चलते उसके पिता की जान चली गई और आज तक सहायता राशि नहीं मिली है।
कुलेश्वर नारंगे, मृतक के पुत्र ने कहा कि न्यायालय के आदेश जारी होने के बाद भी पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है और पीड़ित परिवार जब कुर्की की कार्रवाई के लिए पहुंच रहा है, तब इस शासकीय दफ्तर से जिम्मेदार नदारद हो रहे हैं, ऐसे में इस पीड़ित परिवार को अब भी न्याय की दरकार है।