कृषि उपज मंडी में धान का भाव गिरते ही आवक भी कम हो गई है। त्योहारी सीजन के बाद भी मंडी में काफी कम मात्रा में धान पहुंच रही है। इसकी वजह राज्य सरकार द्वारा लगाया गया प्रतिबंध है। दरअसल छग सरकार ने धान के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके चलते मंडी में धान की नीलामी नहीं हो रही है। जो धान बिक रही है, उसकी भी काफी कम कीमत मिल रही है। इसके चलते किसान पुराने धान और जल्दी पकने वाले किस्म की धान मंडी में नहीं बेच रहे हैं।आमतौर पर मंडी में रोजाना 8 से 10 हजार कट्टा धान की आवक बनी रहती है। लेकिन निर्यात पर प्रतिबंध लगने के बाद मंडल में महज 2 हजार से 25 सौ कट्टा धान ही पहुंच रहा है। कृषि मंडी में राजनांदगांव के अलावा बालोद जिले के किसान भी अपनी उपज बेचने पहुंचते हैं। मंडी में बिकने वाले धान को व्यापारी पोहा मुरमुरा के लिए इस्तेमाल करते हैं, जो अलग-अलग प्रदेशों में भी सप्लाई होता है। लेकिन इन दिनों निर्यात में प्रतिबंध लगने की वजह से व्यापारी धान की खरीदी नहीं कर रहे हैं।धान परिवहन को लेकर इस बार पहले से ही तगड़ी व्यवस्था बनाने के दिए निर्देशप्रदेश सरकार ने धान खरीदी के लिए पहले नवंबर की तारीख तय कर दी है। इसके साथ ही जिलेभर में धान खरीदी को लेकर प्रशासनिक तैयारी तेज हो गई है। राजनांदगांव के अलावा नवगठित जिले केसीजी और एमएमसी में भी धान खरीदी की तैयारी को लेकर अफसर मैदान में उतर गए हैं। बीते दिनों राज्य स्तरीय अफसरों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में जिले के अफसरों को जरुरी निर्देश भी जारी किए हैं। इसमें खासकर धान के परिवहन को लेकर पहले ही तगड़ी व्यवस्था बना लेने कहा गया है।1200 से 1300 रुपए क्विंटल का भाव, किसानों को हो रहा नुकसानधान का भाव गिरने से किसानों को भी नुकसान पहुंच रहा है। इसके चलते किसानों ने फिलहाल धान बेचना ही बंद कर दिया है। इन दिनों मंडी में धान औसत 1250 से 1300 रुपए प्रति क्विंटल में बिक रहा है। जबकि त्योहारी सीजन में ही किसान अपनी जरूरतों और खर्चों के लिए अधिक मात्रा में धान बेचने मंडी पहुंचते थे। लेकिन दाम नहीं मिलने की वजह से किसान मंडी में नहीं पहुंच रहे हैं। धान की आवक मंडी में महज औपचारिकता बनी हुई है।अब बारिश हुई तो तैयार फसल को होगा नुकसानइधर किसानों को बिगड़े मौसम ने परेशान कर रखा है। धान की फसल पूरी तरह तैयार हो चुकी है। लेकिन खड़ी फसल में अब बारिश का खतरा मंडरा रहा है। इससे धान की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है। मौसम विभाग ने खाड़ी में बने सिस्टम से बारिश की आशंका जताई है। अगर बारिश होती है, तो धान की फसल प्रभावित होगी। जिले में दीवाली के बाद फसल की कटाई शुरू होगी। फिलहाल धान की फसल पक रही है।जिले के सवा दो लाख किसान बेचेंगे केंद्रों में धानधान खरीदी के लिए नए किसानों का पंजीयन भी शुरू कर दिया गया है। गिरदावरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई है। पंजीयन की प्रक्रिया 21 अक्टूबर तक चलेगी। इसके बाद पहले नवंबर से धान खरीदी शुरू होगी। इस बार करीब 2 लाख 25 हजार किसान उपार्जन केंद्रों में अपनी उपज बेचेंगे। इसके पहले ही प्रशासन ने बॉर्डर पर सख्ती और अवैध ढंग से धान खपाने वालों की निगरानी शुरू करने की तैयारी की है।

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