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छत्तीसगढ़

सारंगढ़-बिलाईगढ़ : जिले के विभिन्न गौठानों में ट्रैक्टरों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोग कर रहे पैरादान

सारंगढ़-बिलाईगढ़,शासन की बहुआयामी गोधन न्याय योजना के तहत आज जिले के विभिन्न गाँवों में स्थित गौठानों में बड़ी संख्या में लोगों द्वारा पैरादान किया गया। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में किसानों द्वारा खरीफ  की फसल के बाद रबी की फसल के लिए पराली (पैरा) को जलाने से पर्यावरण एवं भूमि की उर्वरा शक्ति को नुकसान पहुंचता है। इसी कड़ी में सारंगढ़ के टिमरलगा, घठोरा और भादिसर ग्राम पंचायत के गौठानों में किसानों और समूह के सदस्यों की पहल से बड़ी संख्या में किसानों ने अपने ट्रैक्टरों की सहायता से गौठानों में पैरादान किया। धीरे-धीरे अब पैरादान करने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।विदित है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल किसानों से पैरा दान करने की अपील प्रदेश के किसानों से कर रहे हैं। वे लगातार पैरादान के फायदे गिनाते हुए किसानों से गौठानों में पैरादान करने की अपील करते आ रहे हैं। साथ ही उन्होंने किसानों से यह भी कहा है कि फसल कटाई के बाद पैरा न जलाएं। पैरादान करने से एक बड़ा लाभ यह भी है कि इससे प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी और मवेशियों के लिए उचित मात्रा में चारे की व्यवस्था भी होगी।

सारंगढ़-बिलाईगढ़, 27 नवम्बर 2022शासन की बहुआयामी गोधन न्याय योजना के तहत आज जिले के विभिन्न गाँवों में स्थित गौठानों में बड़ी संख्या में लोगों द्वारा पैरादान किया गया। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में किसानों द्वारा खरीफ  की फसल के बाद रबी की फसल के लिए पराली (पैरा) को जलाने से पर्यावरण एवं भूमि की उर्वरा शक्ति को नुकसान पहुंचता है। इसी कड़ी में सारंगढ़ के टिमरलगा, घठोरा और भादिसर ग्राम पंचायत के गौठानों में किसानों और समूह के सदस्यों की पहल से बड़ी संख्या में किसानों ने अपने ट्रैक्टरों की सहायता से गौठानों में पैरादान किया। धीरे-धीरे अब पैरादान करने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।विदित है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल किसानों से पैरा दान करने की अपील प्रदेश के किसानों से कर रहे हैं। वे लगातार पैरादान के फायदे गिनाते हुए किसानों से गौठानों में पैरादान करने की अपील करते आ रहे हैं। साथ ही उन्होंने किसानों से यह भी कहा है कि फसल कटाई के बाद पैरा न जलाएं। पैरादान करने से एक बड़ा लाभ यह भी है कि इससे प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी और मवेशियों के लिए उचित मात्रा में चारे की व्यवस्था भी होगी।

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